देश की पहली प्राइवेट मेट्रो रेल रैपिड मेट्रो का ऑपरेशन तीन महीने पहले गुड़गांव में शुरू हुआ। रैपिड मेट्रो रेल प्रबंधन का दावा है कि यह ट्रेनें हाइटेक तकनीक से लैस हैं। मगर कुछ महीने बाद ही ट्रेन के अंदर अगले स्टेशन की सूचना देने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिसप्ले बोर्ड में खराबी आ गई है। इससे यात्रियों को परेशानी होने लगी है।
रैपिड मेट्रो रेल का संचालन गुड़गांव में गत वर्ष के 14 नवंबर को शुरू हुआ था। डीएमआरसी के शटल ट्रेन के रूप में अभी इस ट्रेन में रोजाना तकरीबन 23 हजार लोग यात्रा करते हैं। इन सभी को तकरीबन रोजाना एक ही परेशानी आ रही है। इसका कारण ट्रेन के अंदर के स्टेशन सूचक डिसप्ले बोर्ड का खराब होना है। रैपिड मेट्रो के घुमावदार सफर के कारण यात्रियों को समझ में नहीं आता की वह कहां उतरें।
डिसप्ले बोर्ड खराब होने के कारण यात्रियों को आसानी से पता नहीं चल पाता की अगला स्टेशन कौन सा है। अगला स्टेशन कौन सा है इसकी जानकारी पाने का यात्रियों के पास दो ही माध्यम है। पहला ट्रेन के अंदर कंप्यूटराइज घोषणा या स्टेशन सूचक डिसप्ले बोर्ड।
कई बार यात्री घोषणा नहीं सुन पाता और डिसप्ले बोर्ड भी सूचना नहीं देन रहा है। इससे या तो यात्री कई बार एक स्टेशन पहले उतर जाता है या एक स्टेश्ान आगे चला जाता है। रैपिड मेट्रो रेल की प्रवक्ता ने बताया कि कुछ समय के लिए कभी-कभी तकनीकी खामी आ जाती है। इसका अर्थ ट्रेन में खराबी नहीं है।