दिल्ली विश्वविद्यालय में एकेडमिक काउंसिल (एसी) की बैठक मंगलवार को दूसरे दिन भी हंगामेदार रही। 2 बार बैठक स्थगित भी करनी पड़ गई थी। इस दौरान यूजी और पीजी के नए पाठ्यक्रमों को पास करने के लिए रखा गया। इसमें अंग्रेजी, इतिहास, समाज शास्त्र राजनीति शास्त्र आदि विषयों के पाठ्यक्रम में मौजूद आपत्तिजनक पाठ्य सामग्री का जबरदस्त विरोध हुआ। सदस्यों ने इस सामग्री को तत्काल हटाने की मांग की। एसी ने इन विषयों के पाठ्यक्रमों को पुनर्विचार और संशोधन के लिए वापस कर दिया। कुलपति को पदस्थ करने का सदस्यों का प्रस्ताव ध्वनि मत से पास हुआ।
विवादित पाठ्यक्रम के विरोध मे एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कुलपति कार्यालय पर हंगामा किया। प्रदर्शनकारी कुलपति कार्यालय में धरना पर बैठ गए। वहीं, विद्वत परिषद (एसी) के खिलाफ वाइस रीगल लॉज स्थित वीसी ऑफिस में प्रदर्शन भी किया। उन्होंने डीयू के कुछ विभागों के सिलेबस में हिंदू धर्म संबंधी और राष्ट्रवादी संगठनों से संबंधित गलत तथ्यों को शामिल करने के विरोध में प्रदर्शन करते हुए आपत्तिजनक अंशों को कोर्स से हटाने की मांग की। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विद्वत परिषद हॉल को भी घेर रखा था। खबर लिखे जाने तक धरना जारी रहा।
एकेडमिक काउंसिल सदस्य डॉ. रसाल सिंह बताया कि काउंसिल ने हमारी तार्किक और तथ्यात्मक आपत्तियों का गंभीर संज्ञान लेकर विषयों के सभी पाठ्यक्रमों को संशोधन के लिए वापस कर दिया है। सर्वाधिक आपत्तिजनक सामग्री अंग्रेजी विभाग के पाठ्यक्रम में थी। इसके लिए अंग्रेजी विभागाध्यक्ष का त्यागपत्र भी मांगा गया।
उन्होंने कहा कि यह सामग्री विचारधारा विशेष के चुनिंदा लोगों ने राष्ट्रवादी विचार और भारतीय संस्कृति को बदनाम करने के लिए पाठ्यक्रम में शामिल की है। गुजरात दंगों की पृष्ठभूमि की कहानी मणिबेन बीवीजान पाठ्यक्रम में संघ से संबद्ध बजरंग दल, शिशुगृह और शाखा से जुड़े हुए पात्र को गलत ढंग से दर्शाया गया। गुजरात दंगे में उसकी हत्यारे की भूमिका दिखाई गई है। इतिहास के पाठ्यक्रम से राजपूत, इतिहास अमीर खुसरो और अंबेडकर को गायब कर दिया गया।