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Delhi: श्रीराम भारतीय कला केंद्र में नृत्य नाटिका से होता है रामलीला का मंचन, 1957 में हुई थी शुरुआत

Sun, 25 Sep 2022 08:31 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

इसकी शुरुआत 1957 में हुई थी। इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था। तकनीकी बदलाव के बावजूद इसका क्रम नहीं टूटा है। कथा का सार भी नहीं बदला है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नृत्य नाटिका से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े घटनाक्रम का प्रदर्शन करते कलाकार और लाइटिंग के साथ जुगलबंदी करता संगीत, श्रीराम भारतीय कला केंद्र की रामलीला का मंचन कुछ इसी अंदाज में होता है। इसमें कलाकार संवाद से नहीं बैकग्रांउड संगीत से अभिनय करते हैं। ढाई घंटे में पूरी रामलीला का मंचन हो जाता है।

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इसकी शुरुआत 1957 में हुई थी। इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था। तकनीकी बदलाव के बावजूद इसका क्रम नहीं टूटा है। कथा का सार भी नहीं बदला है। भरतनाट्यम और कलारियापट्टू से लेकर मयूरभंज चाऊ और उत्तर भारत के लोकनृत्यों, शास्त्रीय रागों पर आधारित श्री राम नृत्य नाटिका लयबद्ध संगीत व नृत्य शैलियों के साथ पिछले छह दशकों में विकसित हुई है। हर साल इसके सार को बदले बिना इसमें कुछ नया होता है। भारतीय भाषाओं को नहीं जानने वाले दर्शकों के लिए एलईडी स्क्रीन पर अगल से अंग्रेजी अनुवाद चलता है।

केंद्र की निदेशक पद्मश्री शोभा दीपक सिंह बताती हैं कि मंचन के दौरान सुनाई देने वालीं चौपाइयों का चयन राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने किया था। पहले शो के समय वह महज 13 साल की थीं, तब वह अपनी बहन के साथ वानर सेना का हिस्सा होती थीं। 1969 में जब उन्होंने कार्यभार संभाला तो कलाकारों की समस्याओं को देखते हुए आभूषणों में परिवर्तन कर रवि वर्मा के चित्रों पर आधारित आभूषण बनाए।
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सात लाख से अधिक दर्शक देख चुके हैं
श्रीराम नृत्य नाटिका ने अपनी भव्यता और कलात्मकता को एक सदाबहार कहानी के साथ जोड़ते देश और विदेशों की यात्रा की है। 1957 में स्थापना के बाद से अब तक इसे सात लाख से अधिक दर्शक देख चुके हैं। हर साल इस नाटिका को देखने के लिए देश की जानी मानी हस्तियां पहुंचती हैं।

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धनतेरस तक होता है आयोजन
नवरात्र में होने वाली अधिकतर रामलीलाएं 10 से 11 दिन तक होती हैं लेकिन श्रीराम कला केंद्र की यह खास रामलीला धनतेरस तक चलती है। इस बार रामलीला का आयोजन 26 सितंबर से 22 अक्तूबर तक होगा। सोमवार को इसके 66वें संस्करण का केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी शुभारंभ करेंगी। नृत्य नाटिका का मंचन रोजाना शाम साढ़े छह बजे से सवा नौ बजे तक होगा।

40 से ज्यादा कलाकार प्रस्तुति के लिए तैयार
केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार रामलीला के लिए एक माह पहले से तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार 40 कलाकार भगवान श्रीराम से जुड़े प्रसंगों का मंचन करेंगे। इस बार दर्शकों को कुछ नया परोसने के उद्देश्य से विजुअल ग्राफिक्स और परिधानों को बदला गया है।

उत्तरी दिल्ली के अशोक विहार में हाईटेक मंचन होगा
उत्तरी दिल्ली में भी भगवान राम भक्त हाईटेक मंचन कराएंगे। आदर्श रामलीला कमेटी अशोक विहार फेस-दो सारगर्भित रामलीला का मंचन करेगी। कमेटी के पदाधिकारियों ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में एलान किया कि वह भी बड़े स्तर पर रामलीला का मंचन करा रहे है। कमेटी के अध्यक्ष अशोक गर्ग व मुख्य सलाहकार सतीश गर्ग ने बताया कि रामजन्म से लेकर रावण दहन तक का मंचन निपुण कलाकार प्रस्तुत करेंगे। एलइडी स्क्रीन, कंप्यूटर राइट यंत्रों व विशेष तकनीकी के प्रयोग से पहाड़, झरने, नदी, महल व वन आदि के प्राकृतिक सौंदर्य की झलक दर्शकों को मंत्र मुग्ध करेगी।

रामलीला के दौरान महाभारत भी दिखाई जाएगी
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी की ओर से कैलाश नगर के महावीर पार्क में होने वाली रामलीला के दौरान लोगों को एक दिन महाभारत भी दिखाई जाएगी। इसमें वीर अभिमन्यु के जीवन के बारे में बताया जाएगा। रामलीला कमेटी के प्रधान अरुण गुप्ता ने बताया कि सोमवार से शुरू हो रही रामलीला के लिए इस बार 85 फीट का स्टेज बनाया गया है। रामलीला के दौरान दर्शकों को कई रोमांचक चीजें देखने को मिलेंगी। वरिष्ठ उपप्रधान किशोर कुमार गुप्ता ने बताया कि रामलीला की थीम नो यूज नो प्लास्टिक रखी गई है। रोजाना नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस दौरान संतोष त्रिपाठी उपप्रधान, रोहित जैन, संजय मित्तल, हरिकिशन अग्रवाल, राहुल गुप्ता, अंकुर गुप्ता, अभिषेक गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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