दरअसल, उच्च रक्तचाप के कारण मध्य प्रदेश के शिवपुरी निवासी 48 साल के राजेश को सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती किया गया। इस रोग के कारण उनके किडनी पर असर पड़ा था। जांच के बाद डॉक्टरों ने आठ मार्च को उनकी किडनी प्रत्यारोपण का फैसला किया। राजेश के पिता 70 साल के राम सिंह किडनी देने के लिए तैयार हो गए। लेकिन उच्च रक्तचाप के कारण राजेश की हालत बिगड़ गई और 13 मार्च को डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत के बाद डॉक्टरों के समझाने पर पिता राम सिंह और पत्नी नलिनी ने अंगदान करने का फैसला लिया।
डॉक्टरों ने जांच के बाद राजेश के लिवर और दिल को उपयुक्त पाया। अंगदान के बाद नोटो के नियम के तहत राजेश के दिल को चेन्नई के निजी अस्पताल में भर्ती एक मरीज को आवंटित किया गया। महज तीन घंटे में सर गंगा राम अस्पताल से चेन्नई के अस्पताल में दिल को भेजने के लिए दिल्ली पुलिस ने अस्पताल से एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया। उसके बाद निजी जहाज से चेन्नई एयरपोर्ट तक और उसके बाद एयरपोर्ट से उक्त अस्पताल तक दिल को तीन घंटे के अंदर पहुंचाया गया और प्रत्यारोपण भी करवाया गया। लिवर को गंगा राम में भर्ती ही एक अन्य मरीज को आवंटित किया गया। डॉ. अजय स्वरूप ने बताया कि राजेश के परिवार के लिए यह दुख की घड़ी है।