उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को राजस्व घाटे के लिए पूर्व उपराज्यपाल पर आरोप मढ़ा था। जबकि सूत्रों का कहना है कि सतर्कता निदेशालय (डीओवी) की जांच रिपोर्ट में पाया गया है कि लाइसेंसधारियों को अप्रत्याशित लाभ दिए जाने की वजह से राजस्व हानि हुई। विदेशी शराब की दरों के फार्मूले बदल दिए गए। आयात पास शुल्क को 8.11.2021 को बदल दिया गया। इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी तक नहीं ली गई। राजनिवास से भी इस मामले में राय नहीं ली गई। जांच में यह भी पाया गया है कि थोक मूल्य में कमी करके खुदरा लाइसेंसधारियों की बीयर और विदेशी शराब की इनपुट लागत कम कर दी गई। वित्त विभाग ने 28-10-2021 को एक नोट प्रस्तावित किया। इसे मुख्यमंत्री ने 1.11.2021 को खारिज कर दिया। कई मामले में विभाग के इस प्रस्ताव को जांच में उचित पाया गया।
ड्राई डे घटा कर की गई हेराफेरी
नई आबकारी नीति में महज 3 दिन ड्राई डे रखा गया था। जांच में पाया गया कि विभाग ने मंत्री परिषद और उपराज्यपाल की राय भी इस संबंध में नहीं ली। जबकि बिक्री नीति दिल्ली के पड़ोसी राज्यों से तालमेल वाली होनी चाहिए, नहीं तो कालाबाजारी होने का खतरा रहता है।
बिना किसी सहमति के नीति को विस्तारित किया
जांच में यह पाया गया कि आबकारी नीति तीन बार विस्तारित की गई। पहली बार 1 अप्रैल को, दूसरी बार 31 मई को और तीसरी बार 1 जून से से 31 जुलाई तक। इसके लिए भी किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई। जबकि इस मामले में भी मंत्री परिषद को उपराज्यपाल की राय लेनी चाहिए थी। बिक्री डेटा पर विचार करने के बाद लाइसेंस शुल्क में वृद्धि की जानी चाहिए थी।