रेलवे पुलिस उपायुक्त हरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों की पहचान यूपी के बदायूं निवासी मोहम्मद रिजवान (22), महाराजगंज निवासी भूपेंद्र चौरसिया (20), पंजाब के पठानकोट निवासी गगनदीप सिंह (21), गौरव कुमार (20) और होशियारपुर के अमनदीप सिंह (19) के रूप में हुई है। 30 अगस्त को रेलवे स्टाफ ने कानपुर शताब्दी एक्सप्रेस में खुद को प्रशिक्षु टिकट परीक्षक बता रहे एक युवक को पकड़ा। जांच के दौरान इसके मोबाइल फोन में रेलवे का पहचान पत्र मिला। संदिग्ध लगने पर चीफ टिकट इंस्पेक्टर को सूचना दी गई। आरपीएफ स्टाफ और रेलवे अधिकारी आरोपी को लेकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन थाने पहुंचे।
आरोपी की पहचान भूपेंद्र चौरसिया के रूप में हुई। जांच में पहचान पत्र फर्जी पाया गया। उसने बताया कि रेलवे में नौकरी के लिए उसने प्रशांत शुक्ला को पैसे दिए थे। प्रशांत ने उसे पहचान पत्र दिया था। उसने बताया कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उसके जैसे और भी लड़के हैं, जिसे जालसाजों ने ट्रेनिंग के लिए रखे हैं। रिजवान नाम का युवक रोज उनकी हाजिरी लगाता है और उनको काम सौंपता है। भूपेंद्र के निशानदेही पर पुलिस ने अजमेरी गेट की तरफ से टीटीई की यूनिफॉर्म में खड़े रिजवान को गिरफ्तार कर लिया। इसने भी फोन पर अपना पहचान पत्र दिखाया। उसने बताया कि रेलवे में नौकरी के लिए उसने संदीप नाम के युवक को दो लाख रुपये दे चुका है। संदीप ने उसे हाजिरी लगाने का काम सौंपा था।
इसकी निशानदेही पर पुलिस ने तीन और लड़के को पकड़ा। इनके पास से नियुक्ति पत्र मिला। तीनों की पहचान गौरव कुमार, गगनदीप सिंह और अमनदीप सिंह के रूप में हुई। इन लोगों ने बताया कि उन्होंने पंजाब के होशियार निवासी सुखदेव सिंह को 23 लाख रुपये दिया है। इनके अलावा पुलिस ने देवेश कुमार, सिद्धार्थ शर्मा, मनोज कुमार, विनय कुमार, परमिंदर सिंह और आशीष कुमार को भी पकड़ा। इनके पास किसी तरह का दस्तावेज नहीं मिले। इन छह लोगों ने बताया कि किसी मिश्रा नाम के व्यक्ति ने पैसे लेकर रेलवे में नौकरी देने की बात कही थी। इनलोगों ने अभी पैसे नहीं दिए हैं।
सुरक्षा एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी
जांच में पता चला कि पकड़े गए 11 प्रशिक्षु टिकट परीक्षक अति सुरक्षित नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 15 दिन से ड्यूटी कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी। इनके पकड़े जाने से यहां की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सभी आरोपी रोज रेलवे स्टेशन पर आते थे और ड्यूटी खत्म होने के बाद चले जाते थे। रेलवे में पहले भी टिकट परीक्षक पकड़े गए है, लेकिन यह पहली बार हुआ है कि इतनी बड़ी संख्या में फर्जी प्रशिक्षु टिकट परीक्षक पकड़े गए हैं।
जालसाजी कर ठगी करने वाला गैंग पकड़े गए आरोपियों को भी पता लगने नहीं दिया कि उनके पास फर्जी दस्तावेज है। आरोपियों को अभी टिकट जांचने की जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। उन्हें अभी सिर्फ ट्रेन की जानकारी लेने के लिए कहा गया था। शुरुआती जांच में पता चला कि पकड़े गए आरोपियों को मोबाइल फोन से ड्यूटी करने का निर्देश दिया गया था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि गैंग में काफी लोग शामिल हो सकते हैं।