मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार समेत पांच आरोपियों की हिरासत पर सुनवाई के दौरान सीबीआई को कई बार असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। सीबीआई कभी कोर्ट के सवाल तो कई बार बचाव पक्ष के सवालों से असहज नजर आई।
सीबीआई की ओर से पेश रिमांड अर्जी पर पहली नजर पड़ते ही विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार ने पूछा कि सीबीआई ने दिसंबर 2015 में एफआईआर दर्ज की थी।
तब से यह मामला लंबित है तो अब आरोपियों को गिरफ्तार करने और रिमांड मांगने का आधार क्या है। सीबीआई ने इसके जवाब में कहा कि आरोपियों से पहले भी पूछताछ हुई थी लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया था। अब नए तथ्य सामने आए हैं जिसकी पुष्टि के लिए आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है।
राजेंद्र कुमार शेषनाग हैं
सीबीआई ने आरोपियों का दस दिन का रिमांड मांगते हुए कहा कि मामले की जांच में कई नये तथ्य सामने आए हैं। उनसे संबंधित पूछताछ के लिए आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है।
दिल्ली सरकार इस मामले में राजेंद्र कुमार को लेकर मीडिया में काफी शोरगुल कर रही थी। ऐसा लगता था कि राजेंद्र कुमार शेषनाग हैं और वही अपने फन पर पूरी सरकार को उठाए हुए हैं।
मामले में आरोपी तरुण शर्मा की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने कहा कि इस मामले में 14 दिसंबर 2015 को एफआईआर दर्ज हुई थी। सीबीआई तब से जांच कर रही है।
छह माह बाद एजेंसी क्या पूछताछ करना चाहती है
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आरोपी शुरू से ही एजेंसी का सहयोग कर रहे हैं और कोई नयी बरामदगी एजेंसी ने नहीं की है। गुप्ता ने कहा कि संविधान ने आरोपियों को चुप रहने का अधिकार दिया है। कोई भी जांच एजेंसी किसी भी आरोपी से जबरन कुछ भी नहीं कहलवा सकती।
अब छह माह बाद एजेंसी क्या पूछताछ करना चाहती है। जिस तरह से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है उससे लगता है सीबीआई बेस्ट नहीं बल्कि राजनीतिक एजेंसी है।
मामले में मुख्य आरोपी राजेंद्र कुमार की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने कहा कि उनका मुवक्किल जांच में लगातार सहयोग कर रहा है। सीबीआई उसे पिछले पांच दिन से पूछताछ के लिए बुला रही थी।
सीबीआई अपनी जांच पूरी कर चुकी है
राजेंद्र कुमार
सीबीआई ने उसे कोई नोटिस नहीं दिया और सीबीआई कार्यालय बुलाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले ही सीबीआई अपनी जांच पूरी कर चुकी है। उसके खाते भी सील हैं, घर व दफ्तर पर भी छापेमारी हुई और सीबीआई ने सभी साक्ष्य हासिल कर लिया है।
जांच एजेंसी आरोपियों के आवाज के नमूने ले चुकी है और उसकी एफएसएल रिपोर्ट भी हासिल कर चुकी है। ऐसे में उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी या रिमांड मांगने का कोई आधार एजेंसी के पास नहीं है।
मामले में एक आरोपी व ईएसपीएल के पूर्व निदेशक दिनेश कुमार गुप्ता ने कोर्ट रूम में विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार के समक्ष कहा कि सीबीआई उस पर सरकारी गवाह बनने का दबाव डाल रही है। सीबीआई अधिकारी कहते हैं सरकारी गवाह बन जाओ नहीं तो सब बर्बाद कर देंगे। जांच के दौरान सीबीआई ने उससे मारपीट की थी, जिससे उसके कान का पर्दा फट गया था। इस आरोपी ने 50 करोड़ रुपये मुआवजे का दावा सीबीआई पर ठोंका था लेकिन बाद में वापस ले लिया था।