महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र व दिल्ली सरकार के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा लोगों ने आप को चुना है, आपको उनका विश्वास बनाए रखना होगा।
अदालत ने कहा कि आपको जवाब देना ही होगा और जनता की रक्षा व सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि अपराध संबंधी घटनास्थल पर फिंगर प्रिंट लेने वाले अधिकारी विशेषज्ञ नहीं है। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने अदालत को बताया कि पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100 की संख्या 60 से बढ़ाकर 100 कर दी गई है।
इसी प्रकार महिलाओं के लिए बनाई गई हेल्पलाइन की संख्या भी 4 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है। अदालत ने उनसे पूछा कि हेल्पलाइन नंबर 1091 पर शिकायत मिलने के बाद पुलिस कितनी देर में घटनास्थल पर पहुंच जाती है।
केंद्र सरकार ने कोर्ट महिला सुरक्षा पर दी जानकारी
कोर्ट, अदालत
- फोटो : file photo
यदि पुलिस 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुंचती है तभी लोग स्वयं को सुरक्षित महसूस करेंगे। अदालत ने पूछा कि क्या महिलाएं ज्यादा शिकायत 100 नंबर पर ही करती है। अदालत ने कहा कि यदि पुलिस तय समयसीमा में पहुंचती है तभी उसकी क्षमता की जांच होगी, वरना नहीं।
केंद्र सरकार ने अदालत को महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 370 अतिरिक्त पुलिस वैन की मंजूरी दी गई है। इसी प्रकार 78 स्थानों की पहचान कर सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए है। डीटीसी की 200 बसों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं, दिल्ली सरकार ने सभी सार्वजनिक वाहनों में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य कर दिया है।
सभी सिविक एजेंसियों के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अदालत ने सुनवाई 27 जुलाई तय करते हुए केंद्र सरकार को सभी मुद्दों पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
पुलिसकर्मियों की भर्ती-
अपराध रोकने व जांच प्रक्रिया अलग करने के मुद्दे पर केंद्र ने बताया कि 4227 पदों का सृजन करने पर गृह मंत्रालय ने एक उच्चस्तरीय कमेटी क गठन किया है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद वित्त मंत्रालय की जल्द मंजूरी मिल जाएगी इस पर निर्णय हो चुका है।