पैराबेन्स, सिलिकॉन और सल्फर जैसे घातक रसायनों के खिलाफ हिमालय औषधियों से बनने वाले आयुर्वेदिक उत्पाद लोगों की पहली पसंद बने हैं। बीते 14 नवंबर से जारी अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में प्रगति मैदान के हॉल नंबर 12 में इन उत्पादों के प्रति लोगों में काफी दिलचस्पी देखने को मिल रही है।
यहां आयुथवेदा फेस वॉश है जो पपीते से बनाया है। खड़िया और मुल्तानी मिट्टी से बना साबुन है और चंदन, केसर, मजीठा, तिल से बना कुंकुमादि तेल है। यही नहीं दिल्ली के वायु प्रदूषण से न सिर्फ चेहरा बल्कि शरीर के अन्य ऊपरी भागों से अपना बचाव करने का विकल्प भी मौजूद है।
जानकारी के अनुसार, समुद्री तल से करीब 10 हजार फुट की ऊंचाई पर मौजूद औषधियों से आयुथवेदा फेस वॉश पीएम 2.5 जैसे प्रदूषक तत्वों से सुरक्षा करता है। आयुर्वेद में वर्णित फार्मूलों के आधार पर त्वचा, दांतों एवं बालों की देखरेख को लेकर भी उत्पाद ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के कन्नौज स्थित सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र ने कन्नौज इत्र का इन उत्पादों में इस्तेमाल किया है। भृंगराज, शिकाकाई, तुलसी, तिल, कॉफी बीन्स, पुदीना, सत्व, प्याज, एलोवेरा समेत कुल 42 औषधी के जरिए इन्हें बनाया जा रहा है। यहां ऐसे भी उत्पाद हैं जो महिलाओं के आंतरिक अंगों की स्वच्छता और उन्हें संक्रमण से बचाव में मददगार हैं।
आयुथवेदा के संस्थापक और निदेशक डॉ. संचित शर्मा ने बताया कि बाजार में मौजूद हर्बल उत्पादों में पैराबेन्स, सिलिकॉन और सल्फर जैसे रसायनों का काफी इस्तेमाल किया जाता है। इससे शेल्फ लाइफ को बढ़ाया जाता है लेकिन इनका शरीर पर काफी घातक दुष्प्रभाव होता है। इस तरह के उत्पादों का प्रयोग करने से बैक्टीरिया और फंगस जैसे संक्रमण हो सकते हैं। इसलिए लोगों को इन उत्पादों का चयन करने से पहले रसायनों के बारे में जानकारी लेना चाहिए।
जोड़ों के दर्द से मिलेगी राहत
प्रगति मैदान के इसी हॉल नंबर 12 में आईआईटी कानपुर का भी एक स्टॉल लगा है जिस पर ऐसे हर्बल उत्पादों को रखा है जो सीएसआईआर के साथ मिलकर तैयार किए हैं। इन्हीं में से एक ऐसा उत्पाद है जिसके इस्तेमाल से महज 10 मिनट में जोड़ों के दर्द में आराम मिल सकता है। अर्थराइटिस या फिर अन्य तरह की गठिया को लेकर भी यहां आयुर्वेदिक उत्पाद मौजूद हैं। पास में ही हॉल नंबर 11 है जहां मधुमेह, सर्वाइकल और माइग्रेन को लेकर लोगों को जानकारियां दी जा रही हैं। यहां कुछ ऐसी मशीनें हैं जिनके इस्तेमाल से रोगी अपने लक्षणों की निगरानी कर सकता है।