दिल्ली की पॉलिटिकल स्क्रिप्ट फिर बदलने लगी है। चार दिन पहले सरकार बनाने की भाजपा की जो मुहिम शुरू हुई थी, पार्टी आलाकमान के निर्णय लेने में देरी और कांग्रेस विधायकों के एकजुट हो जाने से अब कमजोर पड़ती दिख रही है।
तीन दिन की कोशिश के बाद कांग्रेस अपने विधायकों को सहेजने में कामयाब हो गई। शनिवार को सभी विधायकों के साथ पार्टी के नेता मीडिया से रूबरू हुए।
कांग्रेस के इस पैतरे से भाजपा की मुहिम को झटका लगा है। वहीं चुनाव की संभावना देखते हुए कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अब आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है।
इससे होगी पार्टी की बदनामी
इसी सियासी ड्रामे के बीच ही आप के लगातार हमले और कांग्रेस के नए पैतरे से प्रदेश भाजपा के नेता अपनी रणनीति बदलने लगे हैं। शनिवार को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने अपने विधायकों को सरकार बनाने के संबंध में ऑफ रिकॉर्ड अथवा ऑन रिकॉर्ड बयानबाजी बंद करने की हिदायत दी है।
साथ ही अगला निर्देश आने तक आगामी चुनाव की संभावना के मद्देनजर तैयारियों में जुट जाने को कहा है। कहा यह भी जा रहा है कि पार्टी के एक धड़े ने जोड़ तोड़ से सरकार बनाने की कोशिश का यह कहकर विरोध किया है कि इससे पार्टी की काफी बदनामी होगी।
इसका असर दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। इसके चलते भी भाजपा की मुहिम कमजोर हुई है।
माहौल देखकर सावधान हुई कांग्रेस-भाजपा
दरअसल, सरकार न बनने की स्थिति में आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों आप को बड़ा खतरा के तौर पर देख रहे हैं।
भाजपा की सरकार बनवाने में अपने विधायकों का नाम आने के बाद सक्रिय हुई कांग्रेस ने तीन दिन में मामला संभाल लिया और सभी विधायकों को एकजुट कर आप पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए हमला बोल दिया।
हालात को भांपते हुए आप पर हमला भाजपा ने भी बोला है और दिल्ली में माहौल खराब करने का आरोप लगाया है। दोनों की परेशानी का सबब आप का जनाधार है। 2013 के विधानसभा चुनाव में आप को अप्रत्याशित तौर पर 29.64 फीसदी मत के साथ 28 सीटें मिली थीं। लोकसभा चुनाव में सीटें तो नहीं मिलीं, लेकिन उसका वोट प्रतिशत 32.9 रहा।