गुलेल से कारों का शीशा तोड़ने और फिर चोरी करने वाले गुलेल गिरोह के तीन सदस्य पुलिस गिरफ्त में आए हैं। उनके पास से चोरी की कार, पर्स और दो लैपटॉप बरामद किए गए हैं।
थाना सेक्टर-39 पुलिस ने बताया कि पकड़े गए सदस्यों में दो नाबालिग हैं। शनिवार रात चेकिंग के दौरान राजकीय डिग्री कॉलेज के पास एक कार में सवार युवकों को पकड़ने का प्रयास किया गया। तीन युवक फरार हो गए, लेकिन तीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
चोरी की कार और सामान के अलावा इन लोगों के पास से गुलेल, पत्थर और कार खोलने के औजार मिले। पकड़े गए लोगों में एक युवक रमेश है, जो दिल्ली के मदनगीर में रहता है और दोनों नाबालिगों का मामा लगता है। पुलिस सूरज उर्फ डैनी, सत्यवेल और अरुण की तलाश कर रही है।
सीओ फर्स्ट शिवराम यादव ने बताया कि पूछताछ में नोएडा की दो दर्जन वारदातों का खुलासा हुआ है।
बच्चों से करवाते हैं चोरी
तमिलनाडु के कई जिलों से आकर दिल्ली के मदनगीर इलाके में गिरोह ने अपना ठिकाना बनाया है। इस गिरोह में 50 से ज्यादा लोग हैं, जो एनसीआर में वारदातों को अंजाम देते हैं। ज्यादातर सदस्य आपस में रिश्तेदार हैं। गिरोह का बड़ा सदस्य गुलेल से कार का शीशा तोड़ देता है और फिर बच्चा कार से सामान चुराता है।
पकड़े जाने पर ये बच्चे तमिल में बात करते हैं, ताकि बाकी सदस्यों के बारे में पता न चल पाए। सामान चुराने के लिए कभी-कभी गैंग कार चालक को बातों में उलझाता है और इस दौरान बच्चे समान उड़ा लेते हैं।
बाल अपराध संबंधी निर्देश की उड़ी धज्जियां
थाना सेक्टर-39 पुलिस ने वाहवाही के चक्कर में बाल अपराध से संबधित दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ा दीं। प्रेस नोट में दोनों नाबालिगों के नाम, उनके पिता का नाम व पूरा पता उम्र के साथ लिखा है।
जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि ऐसी स्थिति में बच्चों की पहचान जाहिर नहीं की जाएगी। थाना प्रभारी धर्मेन्द्र चौहान इसे प्रेस नोट बनाने वाले सिपाही की गलती बता रहे हैं।