कृषि कानूनों का विरोध करते किसान
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दिल्ली-जयपुर हाईवे पर मसानी बैराज के पास तनाव के माहौल में अर्धसैनिक बल और आंदोलनकारी किसान आमने-सामने हैं। सोमवार को बारिश और कड़ाके की ठंड में डटे किसान दिल्ली जाने पर अड़े रहे। किसानों को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। शाम को वार्ता विफल होने की सूचना के बाद किसानों में गुस्सा बढ़ गया। उनका कहना है कि अब वे कभी भी दिल्ली कूच कर सकते हैं।
हाईवे पर किसान अपने ट्रैक्टरों और टेंट में हैं, जबकि पुलिस आंसू गैस के गोलों के साथ फ्लाईओवर पर तैनात है। पुलिस ने हाईवे के बीच में कंटेनर और ट्रक लगाकर रास्ता बंद कर दिया है। मसानी बैराज के पास करीब दो हजार किसान बैठे हैं। हरियाणा-राजस्थान सीमा के खेड़ा बॉर्डर से लेकर मसानी बैराज तक 35 किमी हाईवे अब पूरी तरह बंद है। किसानों का पड़ाव खेड़ा बॉर्डर, बनीपुर चौक, संगवाड़ी और मसानी बैराज पर है। उधर, सोमवार को खेड़ा बॉर्डर से करीब 300 ट्रैक्टर-ट्रॉली में किसान टीकरी बॉर्डर के लिए रवाना हुए। उनका कहना है कि रेवाड़ी प्रशासन ने किसानों को कंटेनर लगाकर रोका। अब आंसू गैस के गोले छोड़कर आगे बढ़ने से रोक रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन कितनी भी कोशिश कर ले, किसान दिल्ली जाकर रहेंगे।
दवाएं नहीं पहुंचने देने का आरोप
मसानी बैराज पर किसानों का नेतृत्व कर रहे रणजीत उर्फ राजू ने कहा कि ठंड में किसान सड़कों पर हैं। प्रशासन मदद करने की बजाय दवा तक नहीं पहुंचने दे रहा। किसानों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ठंड और बारिश से बच्चे व बुजुर्ग बीमार हैं, लेकिन हम किसी भी कीमत पर दिल्ली कूच करेंगे।
ठंड लगने से गई किसान की जान
दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन में गए संगरूर के गांव बखोपीर निवासी किसान गुरचरण सिंह (67) की ठंड लगने से मौत हो गई। स्थानीय किसान यूनियन के ब्लॉक उपाध्यक्ष गुरभजन सिंह बखोपीर ने बताया कि गुरचरण कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन में शामिल होने गए थे। अधिक ठंड लगने से उनकी सेहत खराब हो गई और वे रविवार को घर आ गए। रात में ही तबीयत ज्यादा बिगड़ने से उनकी मौत हो गई।