फरीदाबाद के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल बीके में दवाओं का टोटा हो गया है। बढ़ती गर्मी में जहां दिनों दिन अलग-अलग बीमारियों के मरीज बढ़ रहे है। वहीं अस्पताल में बीमारियों से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं है।
अस्पताल की हालत पर अगर नजर डालें तो यहां दवा स्टोर तो है लेकिन स्टोर में दवाएं नहीं है। आठ दिनों से अस्पताल में दवाओं का स्टॉक खत्म है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को दवाएं बाहरी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही है। डॉक्टरों द्वारा मरीजों को जो दवाएं लिखी जा रही हैं उनमें से अधिकांश दवाएं मरीजों को कॉमबीनेशन में दी जा रही है।
पीएमओ डॉ. किशन कुमार ने बताया कि वेयर हाउस को जल्द से जल्द दवाएं देने के लिए कहा गया है। ऐसी स्थिति भविष्य में न हो, इसके लिए स्थानीय निजी दवा सप्लायरों से संपर्क किया जा रहा है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
दवाएं जिनकी है कमी
ब्रूफीन (दर्द निवारक दवा), एंटीबॉयटिक- एमोक्सी, सिफलाक्सिन, गिलमबेन क्लेमाइड (शुगर की दवा), डायरीफाइलाइन (सांस के रोगियों के लिए), ईसोमोनोट्रेट (ब्लड प्रेशर की दवा), बी-कॉम्पलेक्स, कैलशियम की दवा, क्लिनडामायसिन, ओमपेराजोल (गैस की समस्या), डायवो टेबलेटस (एसिटीडी के लिए), पीसीएम सिरप, कॉफ सिरप, ईयर ड्रॉप, आई ड्रॉप आदि।