देश की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने वाला सट्टा कारोबार पाकिस्तान से संचालित हो रहा है। वहां से जारी होने वाला यह नंबर मुंबई-दिल्ली से होता हुआ उनके मोबाइल तक पहुंचता है। सट्टे के इस खेल में नंबर और रुपये का लेनदेन नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है।
जिले में ऑफलाइन सट्टा कारोबार के सरगना राजू बर्फवाला ने बताया कि इसका जाल देश के हर जिले, तहसील और मोहल्लों तक फैला है। खुद को इस कारोबार का एक छोटा मोहरा बताने वाले राजू का दावा है कि पुलिस मुख्य संचालकों तक नहीं पहुंच सकती। उसने बताया कि पाकिस्तान में बैठे संचालक सट्टे का नंबर जारी करते हैं।
इसके लिए लाइन किराए पर लेनी पड़ती है। सट्टा कारोबार में ऊपर के स्तर पर कमीशन नहीं लिया जाता बल्कि लाइन का एकमुश्त भुगतान किया जाता है। लाइन के लिए प्रतिमाह पंद्रह से बीस हजार रुपये किराये का भुगतान किया जाता है। यह धन दिल्ली-मुंबई के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे सर्वर संचालकों तक पहुंचाया जाता है।
इंटरनेट के आधुनिकतम सॉफ्टवेयर के जरिए यह नंबर लाइन लेने वाले के मोबाइल पर मैसेज के रूप में आता है। मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल न होने की वजह से यह खेल सर्विलांस सिस्टम की पकड़ में नहीं आता।
उसके मोबाइल पर सट्टे के नंबर का मैसेज कहां से आता है, यह उसे नहीं मालूम। बताया कि उस नंबर पर मैसेज रिप्लाई करने पर सेंडिंग फेल बताता है। सेक्टर-48 सीआईए प्रभारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि रिमांड पर लेने के बाद सटोरियों से पूछताछ की जाएगी।