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1984 दंगा: एक मात्र आरोपी तीस साल बाद बरी

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1984 सिख दंगों के दौरान पुलबंगश इलाके में तीन सिखों की हत्या के मामले में आरोपी सुरेश कुमार पानेवाला को बुधवार को बरी कर दिया। सीबीआई ने वर्ष 2009 में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को क्लीन चिट दी थी जबकि सुरेश कुमार पानेवाला के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी।
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कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय बंसल ने बुधवार को पुल बंगश सिख दंगा मामले में आरोपी सुरेश कुमार पानेवाला को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने मामले में बहस पूरी होने के बाद तीस जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अंतिम जिरह के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता मुकेश कालिया ने कहा कि उनका मुव्वकिल घटना के समय मौके पर नहीं बल्कि अपने कार्यालय में था। अभियोजन के किसी भी गवाह ने सुरेश कुमार पानेवाला को नहीं पहचाना क्योंकि वह मौके पर नहीं था।
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इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुआ था दंगा

सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि एजेंसी को इलाके के बीसी सुरेश की तलाश थी लेकिन उसके बजाय उनके मुव्वकिल को इस मामले में फंसा दिया।

सीबीआई ने इस मामले में दो अप्रैल 2009 को आरोपी सुरेश कुमार पानेवाला के खिलाफ दंगा, गंभीर रूप से घायल करने, आगजनी व हत्या संबंधी धाराओं में चार्जशीट पेश की थी। दूसरी ओर कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को क्लीन देते हुये उनके पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी।

पेश मामला इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजधानी में हुए सिख विरोधी दंगों से जुड़ा है। पुल बंगश इलाके में हुए दंगों में तीन नवंबर 1984 को तीन सिखों गुरबचन सिंह, बादल सिंह और ठाकुर सिंह को जलाकर मार दिया गया था।

पुलिस ने दंगों के सिलसिले में 31 लोगों को आरोपी बनाया था, लेकिन मुकदमों की सुनवाई के बाद सभी बरी हो गए थे। नानावती जांच आयोग की सिफारिशों के मद्देनजर सरकार ने 2005 में सिख दंगों की जांच का आदेश सीबीआई को दिया था।
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टाइटलर को सीबीआई ने दी थी क्लीन चिट

सीबीआई ने कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के पक्ष में मार्च 2009 में क्लोजर रिपोर्ट दी थी, जिसे एसीएमएम राकेश पंडित की अदालत ने 27 अप्रैल 2010 को स्वीकार कर लिया था। सीबीआई ने जसबीर सिंह व सुरेंद्र सिंह के बयानों को विरोधाभासी बताते हुए क्लीन चिट दी थी।

जांच एजेंसी का कहना था कि जिस दिन टाइटलर पर दंगों में शामिल होने का आरोप है उस दिन वह इंदिरा गांधी के पार्थिव शरीर के पास तीन मूर्ति भवन में मौजूद थे। यह बात दूरदर्शन की सीडी से सामने आई है। सीबीआई ने इससे पहले भी सितंबर 2007 में टाइटलर के मामले में क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी।

सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट और निचली अदालत के आदेश को लोकेंदर कौर ने सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सीबीआई ने जांच के दौरान कई सबूतो की अनदेखी की और कई चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए। याचिका में कहा गया कि सीबीआई ने दंगों के चश्मदीद रेशम सिंह, संतोख सिंह, चंचल सिंह व आलम सिंह के बयान दर्ज नहीं किए।

सत्र अदालत ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद दस अप्रैल 2013 को सीबीआई की क्लीन चिट और मेजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने वाले आदेश को खारिज कर दिया था। अदालत ने तीसरी बार सीबीआई को आगे जांच का आदेश दिया था।
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