चुनावी हार पर सपा और बसपा भले अपने पदाधिकारियों की खिंचाई कर रही हैं, लेकिन इससे जुदा कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाकर अगले चुनाव के लिए तैयार कर रही है।
पार्टी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री ने जिला व शहर अध्यक्षों को हार के बिंदुओं को चिह्नित करने के लिए तो कहा है, साथ ही नए जोश से टीम तैयार करने के लिए भी कहा है।
उन्होंने जिलाध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा है कि ‘एक बार सूखा पड़ जाता है तो इसका मतलब यह नहीं होता कि जमीन बंजर हो गई है और उसमें पैदावार की ताकत समाप्त हो गई’
उन्होंने पुराने उदाहरण देकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया है। निर्मल खत्री ने कहा है कि ब्रिटिश साम्राज्यवाद से अब तक 129 साल के इतिहास में कांग्रेस ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 1977, 1989, 1996, 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस जनता का विश्वास जीतने में विफल रही है।
उन्होंने कहा है कि कार्यकर्ताओं को निराश होने की बजाए नए जोश से जनता का विश्वास जीतना है। प्रदेश अध्यक्ष ने पदाधिकारियों को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से हार की कमियों को तलाशने और समीक्षा करने के लिए कहा है। उन्होंने जिला और महानगर अध्यक्षों से हार के कारणों की लिखित जानकारी मांगी है।
प्रदेश भर से मिलने वाले इन कारणों के बिंदुओं पर जल्द ही प्रदेश मुख्यालय पर बैठक होगी। इसमें सभी जिला और महानगर अध्यक्षों समेत प्रदेश के आला पदाधिकारी शामिल रहेंगे। बकौल जिलाध्यक्ष बिजेंद्र यादव प्रदेश हाईकमान ने चुनाव के समय पार्टी छोड़ ने वालों की सूची मांगी है।