बड़ी-बड़ी झांकियों को हाथों से खींचते आ रहे हैं शिवभक्त
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सावन के पवित्र महीने में शिवभक्ति की लहर दिल्ली की सड़कों पर उमड़ पड़ी है। शिवभक्त पारंपरिक कांवड़ के स्थान पर इस बार विशाल झांकी रूपी कांवड़ लेकर हरिद्वार व गौमुख से राजधानी पहुंचे। इन झांकी कांवड़ों को श्रद्धालु हाथों से खींचते हुए लाए है जिनमें शिव मंदिर, कैलाश पर्वत, बाबा बर्फानी, माता पार्वती और गंगा अवतरण के दृश्य बेहद भव्य रूप में सजे हुए थे। लकड़ी, थर्माकोल, रंग-बिरंगे कपड़ों और साज-सज्जा की सामग्री से तैयार इन झांकियों में बिजली की झालरों, स्पीकरों पर गूंजते भजनों और चलते-चलते धूप-अगरबत्ती की महक ने भक्तिमय माहौल बना दिया।
झांकी कांवड़ों को रास्ते में कई जगह लोग ठहर कर देखते दिखे। कहीं, बच्चों की टोलियां तालियां बजाकर स्वागत करती दिखीं तो कहीं लोग फूलों की वर्षा करते नजर आए। सैंकड़ों की संख्या में शिवभक्त झांकी के आगे-पीछे डमरू बजाते, भजन गाते, बोल बम के जयघोष करते हुए चलते रहे। इन कांवड़ झांकियों में गंगाजल से भरे पात्र को शिवलिंग के भीतर स्थापित किया गया था। कुछ झांकियों को ट्रॉली और छोटे वाहन पर सजाया गया था जिन्हें श्रद्धालु खुद खींचते हुए ला रहे थे।
खास बात यह रही कि अधिकतर झांकियों में गंगा, शिव और काशी की छवियां बनाई गई थीं जो न सिर्फ देखने में सुंदर थीं, बल्कि आस्था से भी ओतप्रोत रहीं। झांकी रूपी कांवड़ लाने वाले भक्तों के अनुसार, वे महीनों पहले इसकी तैयारी में जुट गए थे और इसका उद्देश्य भोलेनाथ की महिमा को जन-जन तक पहुंचाना है। दूसरी ओर बड़ी संख्या में शिव भक्त अलग-अलग रिवाज और अंदाज में कांवड़ लेकर आ रहे है। कुछ श्रद्धालु पारंपरिक झूला कांवड़, खड़ी कांवड़ और बैठी कांवड़ लेकर आ है जिनमें दोनों ओर तांबे या स्टील के लोटे या प्लास्टिक की केन में गंगाजल रखा गया है। इसके अलावा गंगाजल से भरी कई-कई टोकनी वाली कांवड़ ला रहे है। कई शिवभक्त भगवा कपड़े और रस्सियों में बंधी छोटी-छोटी केनों को गले में डालकर सरल व सादगीपूर्ण अंदाज में कांवड़ लेकर चल रहे हैं।