ट्रैफिक पुलिसकर्मी अब पेड़ की आड़ लेकर चालान नहीं काट रहे हैं। इसका कारण है कि ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को चालान करने का टारगेट नहीं मिल रहा है। इससे ट्रैफिक पुलिसकर्मी काफी खुश हैं। अब उसी का चालान किया जा रहा है जो ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता हुआ दिखाई दे रहा है। पुलिसकर्मी चालान काटने की चिंता को छोड़कर सुचारु यातायात व्यवस्था पर जोर दे रहे हैं।
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गौरतलब है कि 31 अगस्त तक ट्रैफिक पुलिसकर्मी पेड़ के पीछे छिपकर चालान करते थे। पुलिसकर्मी पेड़ या फिर किसी चीज की आड़ में छिपकर खड़े रहते थे। जैसे ही कोई वाहन चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता था तो पुलिसकर्मी तुरंत सड़क पर आकर उसे पकड़ लेता था और उसका चालान कर देता था।
दिल्ली ट्रैफिक की दक्षिणी रेंज के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 31 अगस्त तक दिल्ली पुलिस के हर सर्किल ट्रैफिक इंस्पेक्टर और जैडो को चालान करने का टारगेट दिया जाता था। अगर चालान करने का टारगेट पूरा नहीं होता था तो सर्किल इंस्पेक्टर और जैडी को एक्सप्लेशन (सजा जैसा) दिया जाता था। टीआई और जैडो अपने टारगेट को पूरा करने के लिए चालान करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते थे।
इसी रेंज के दूसरे ट्रैफिक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब से संशोधित व्हीकल एक्ट लागू हुआ है तब से यानी एक सितंबर से टीआई और जैडो को चालान का टारगेट नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में उनके ऊपर चालान करने का प्रेशर खत्म हो गया है।
दिल्ली ट्रैफिक के नरेला सर्किल के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब चालान करने का प्रेशर ऊपर से नहीं आ रहा है। अब जितने चालान हो रहे हैं उतने ही किए जा रहे हैं।