अब सेटेलाइट इमेज नगर निगम के टैक्स घपलों की पोल खोलेगी। नगर निगम में दर्ज संपत्तियों के रिकार्ड का मिलान सेटेलाइट इमेज के डाटा से किया जाएगा।
ऐसे में किसी प्रापर्टी का क्षेत्रफल कम दर्शाया गया होगा तो वह पकड़ में आ जाएगा। इस हाईटेक तकनीक से घपलों पर तो रोक लगेगी ही शहर के लोगों को भी राहत मिलेगी।
निगम के टैक्स विभाग के कई घोटाले सामने आ चुके हैं। कविनगर जोन में एक बिल्डिंग का क्षेत्रफल कम दर्शाकर हाउस टैक्स कम लिए जाने का मामला भी सामने आ चुका है। मैनुअल व्यवस्था में कमान निगम कर्मचारियों के हाथ में रहती है।
जितना चाहे उतना क्षेत्रफल दर्शाकर टैक्स निर्धारण कर दिया जाता है। क्षेत्रफल कम दर्शाने के ज्यादातर मामले कामर्शियल बिल्डिंगों में सामने आए हैं। लेकिन अब नगर निगम सेटेलाइट इमेज के जरिए बिल्डिंग्स के क्षेत्रफल का ब्योरा तैयार करा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक सेटेलाइट इमेज के जरिए पैमाइश में खेल किया गया तो पकड़ में आ जाएगा। पूर्व में दर्ज किए गए बिल्डिंग का ब्योरा का मिलान किया गया तो पुराने मामले भी सामने आ जाएंगे।
सेटेलाइट इमेज के आधार पर बिल्डिंग पर टैक्स लगाया जाएगा। इस नई व्यवस्था से निगम में इंस्पेक्टर राज पर भी अंकुश लगेगा।