31 अगस्त को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में अमेजन के सीनियर मैनेजर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। छानबीन हुई तो हत्याकांड में ‘माया गैंग’ का नाम सामने आया। पुलिस ने समीर उर्फ माया नामक लड़के को गिरफ्तार भी कर लिया। हत्याकांड की जांच हुई तो पता चला कि चंद ही दिनों पहले माया बालिग हुआ है। बालिग होने से पूर्व उसने व उसके नाबालिग साथियों ने चार लोगों की महज टशन में हत्या कर दी और कई पर जानलेवा हमला भी किया।
‘नाम बदनाम, पता कब्रिस्तान, उम्र जीने की, शौक मरने का’...। राजधानी के तेजी से उभरते माया गैंग की सोशल मीडिया पर डाली गई टैग लाइन दिल्ली में बढ़ते नाबालिगों के आतंक की पर्याय है। टशन, नशा, मौज-मस्ती और सोशल मीडिया पर छा जाने की ललक इन नाबालिगों को अपराध के दलदल में घसीट रही है।
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चंद दिनों पूर्व बालिग हुए माया गैंग के कारनामे न केवल समाज, बल्कि पुलिस के लिए भी सिरदर्द बने हुए हैं। माया तो बस एक मिसाल भर है, राजधानी में नाबालिग अपराधियों कई गैंग जिनमें 78-गैंग, शाहदरा शूटर्स, बदनाम गैंग, संजू गैंग और न जाने कितने गैंग अपना सिक्का जमाने में जुटे हैं।
वर्चस्व कायम करने, टशन, मौजमस्ती नशा और सोशल मीडिया पर छा जाने के लिए नाबालिग बहुत तेजी से अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि शिक्षा की कमी, नशे की लत, हिंसात्मक फिल्में और वेब सीरीज इनके जीवन में बहुत नकारात्मक असर डाल रहे हैं। समय पर सही रास्ता न दिखाए जाने की वजह से बाद में यह बड़े अपराधी बन जाते हैं।
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अमेजन के सीनियर मैनेजर की हत्या में सामने आया नाम
31 अगस्त को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में अमेजन के सीनियर मैनेजर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। छानबीन हुई तो हत्याकांड में ‘माया गैंग’ का नाम सामने आया। पुलिस ने समीर उर्फ माया नामक लड़के को गिरफ्तार भी कर लिया। हत्याकांड की जांच हुई तो पता चला कि चंद ही दिनों पहले माया बालिग हुआ है। बालिग होने से पूर्व उसने व उसके नाबालिग साथियों ने चार लोगों की महज टशन में हत्या कर दी और कई पर जानलेवा हमला भी किया।
सोशल मीडिया पर छा जाने का जुनून
इन नाबालिग लड़कों को सोशल मीडिया पर छा जाने का इतना जनून है कि ज्यादातर लड़कों ने फेसबुक, यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया पर अपने अकाउंट बनाकर वहां हथियारों के साथ अपने वीडियो और गाने तक डाले हुए हैं। माया नामक बदमाश के तो इंस्टाग्राम पर दो हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
पुलिस के लिए यह नाबालिग अपराधी सिरदर्द बने हुए हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस साल 15 अगस्त तक पुलिस ने महज हत्या करने के मामले में 112 नाबालिगों को हिरासत में लिया। इसके अलावा सभी तरह के अपराधों में 1707 नाबालिगों को हिरासत में लिया गया।
नर्म कानून का उठा रहे फायदा
अपराध करने वाले नाबालिगों को अच्छी तरह पता है कि जुर्म के बाद कानून नर्म होने का इनको फायदा मिलेगा और चंद ही दिनों में वह बाल सुधार गृह से बाहर होंगे। सात साल से कम सजा वाले अपराधों में तो नाबालिग को परिवार को ही सौंप दिया जाता है। कई बार तो दिल्ली के बड़े गैंग ने नाबालिगों को हथियार और पैसे उपलब्ध करवाने के बाद अपने फायदे के लिए इनसे अपराध करवाए हैं।
सोशल मीडिया पर छा जाने का जुनून
इन नाबालिग लड़कों को सोशल मीडिया पर छा जाने का इतना जनून है कि ज्यादातर लड़कों ने फेसबुक, यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया पर अपने अकाउंट बनाकर वहां हथियारों के साथ अपने वीडियो और गाने तक डाले हुए हैं। माया नामक बदमाश के तो इंस्टाग्राम पर दो हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
पुलिस के लिए यह नाबालिग अपराधी सिरदर्द बने हुए हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस साल 15 अगस्त तक पुलिस ने महज हत्या करने के मामले में 112 नाबालिगों को हिरासत में लिया। इसके अलावा सभी तरह के अपराधों में 1707 नाबालिगों को हिरासत में लिया गया।
अपराध से दूर रखने के पुलिस के इंतजाम:
-दिल्ली के कई थानों में पुलिस ने अपनी लाइब्रेरी खोली है।
-बाहरी जिला पुलिस उपायुक्त कार्यालय ने बुक बैंक शुरू किया।
-निजी कंपनियों की मदद से रोजगार मेलों का आयोजन कराना।
-स्लम एरिया के बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास।
-अपराधियों को मुख्य धारा में लाने को स्किल ट्रेनिंग कार्यक्रम।
नाबालिगों के कुछ ताजा अपराध
-20 सितंबर 2023: गाजीपुर में चार नाबालिगों ने युवक की चाकू घोंपकर हत्या की, चारों को पकड़ा।
-10 सितंबर 2023: संगम विहार में आठ नाबालिगों ने युवक को चाकू से घोंपकर हत्या, आठ दबोचे।
-31 अगस्त 2023: माया गैंग ने अमेजन के सीनियर मैनेजर की हत्या, मामा को भी गोली मारी।
-30 अगस्त 2023: जामिया नगर के बटला हाउस में नाबालिग ने युवक की गला रेतकर हत्या की।
नाबालिगों के अपराध में शामिल होने की सबसे बड़ी वजह गृह क्लेश, शिक्षा की कमी, बुरी संगत और नशे की लत है। पुलिस, सरकार और कई एनजीओ इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन वह नाकाफी हैं। बच्चे जो देखते हैं, वह उसे फॉलो करते हैं। किसी दोस्त की बुरी संगत में पड़कर अक्सर वह गलत रास्ते पर निकल जाते हैं। झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले बच्चे जब किसी जब अमीर बच्चे को देखते हैं तो उनके मन में वैसी ही जिंदगी जीने की इच्छा जागती है। -केएल यादव, पूर्व एसीपी दिल्ली पुलिस