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अब नहीं होगा यमुना का रेलवे पुल बंद: सुपर होगी सुपरफास्ट की चाल, दिल्ली-हावड़ा रूट पर ट्रेनों की आवाजाही होगी आसान

Sun, 03 Jul 2022 02:49 AM IST
Vikas Kumar नवनीत शरण, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सबसे व्यस्तम रूट में शुमार दिल्ली-हावड़ा-दिल्ली रूट की ट्रेन इस ब्रिज से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचती है। रोजाना करीब 200 ट्रेन व मालगाड़ी इस ब्रिज से गुजरती है।
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यमुना नदी पर बन रहा नया रेलवे पुल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खतरे का निशान पार करते ही अब यमुना का रेलवे पुल बंद नहीं होगा। पुरानी दिल्ली-हावड़ा रूट हर मौसम में चालू रहेगा। पीक आवर्स में प्लेटफार्म पर पहुंचने से पहले ट्रैक पर ट्रेन के पहिए भी नहीं थमेंगे। दरअसल, उत्तर रेलवे ने यमुना नदी पर पुराने रेलवे पुल के बराबर में नया पुल तैयार करने जा रहा है। अगले साल सितंबर तक इस पर ट्रेन की आवाजाही शुरू हो जाएगी। रेल प्रशासन का कहना है कि सितंबर 2023 पर नए पुल से आवाजाही शुरू हो जाएगी। पुल एक साथ रेलवे को कई जोखिमों से उबार लेगा।

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इस वक्त पुरानी दिल्ली-गाजियाबाद के बीच चलने वाली ट्रेन पुराने दो मंजिला लोहे के पुल से गुजरती हैं। पुल के ऊपरी तल पर रेलवे और निचले तल से वाहन चलते हैं। पुराना होने की वजह से जब भी यमुना खतरे के निशान को पार करती है, लोहे के पुल को बंद कर दिया जाता है। इसी दिक्कत से निकलने के लिए रेलवे ने करीब 15 साल पहले नया पुल तैयार करने की योजना बनाई थी। लेकिन अलग-अलग वजहों से इसमें देरी होती रही। 

रेलवे अधिकारियों की मानें तो सारी बाधाएं दूर कर ली गई हैं। सितंबर 2023 तक इसे हर हाल में तैयार कर लिया जाएगा। लोहे के पुल की ढलती उम्र और रेल यातायात के दबाव को देखते हुए 1997-98 में ही नए ब्रिज निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी और तत्कालीन रेल मंत्री ने आधारशिला भी रखी थी।

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पुल एक, अड़चनें अनेक

नये ब्रिज की रेलवे लाइन का अलाइनमेंट सलीमगढ़ फोर्ट से होते हुए ही निकाला गया था। ऐसे में ब्रिज के निर्माण और उसके आसपास नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की मंजूरी लेनी जरूरी थी, लेकिन इसकी मंजूरी नहीं मिली। इससे करीब पांच साल तक काम शुरू नहीं हो सका था। अलाइनमेंट में बदलाव करने के बाद फिर से 2013 में निर्माण की मंजूरी मिली। निर्माण पूरा करने का लक्ष्य 2016 में रखा गया था। बाद में इसे 2018 कर दिया गया। फिर दिसंबर 2020 और अब सितंबर 2023 रखा गया है। 

इसलिए रही निर्माण की चाल धीमी

रेलवे के अधिकारियों के अनुसार निर्माण में कई अवरोध आए। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि पुल के पिलर्स बनाने के दौरान नदी के निचले हिस्से में चट्टानें पाई गईं हैं। नदी के तलहटी में आमतौर पर अलग-अलग तरह की चट्टानें नहीं पाई जाती हैं। इसकी वजह से नींव ढालने के काम में वक्त लग गया। इसके अलावा हर साल बारिश के मौसम में चार महीने तक काम भी रोकना पड़ता है। स्टील गर्डर्स के निर्माण के लिए अत्याधुनिक वर्कशॉप बनाई गई है। गर्डर अब लगने लगा है। गर्डर लॉन्च करने में कैंटीलिवर मेथड का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि जल्दी से लाइन बिछाई जा सके।

इतना जरूरी है ब्रिज नंबर 249

सबसे व्यस्तम रूट में शुमार दिल्ली-हावड़ा-दिल्ली रूट की ट्रेन इस ब्रिज से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचती है। रोजाना करीब 200 ट्रेन व मालगाड़ी इस ब्रिज से गुजरती है। सुबह के वक्त गाजियाबाद-शहादरा की तरफ से दिल्ली प्रवेश करने वाली ट्रेन कतार में खड़ी हो जाती है। क्योंकि पुल पर दबाव व पुरानी दिल्ली स्टेशन पर ट्रेनों की अधिक संख्या की वजह से ग्रीन सिग्नल नहीं मिलता। इस वजह से आउटर पर यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। ब्रिज के आगे सीलमपुर तक नई रेल ट्रैक बिछाई जाएगी। सीलमपुर के बाद ट्रेन पुरानी पटरी पर ही दौड़ेगी।

यमुना ब्रिज निर्माणकार्य तेजी से चल रहा है। सितंबर 2023 तक निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। आधुनिक तकनीक आधारित सिग्नलिंग सिस्टम से लैस किया जाएगा। ट्रेन की गति भी धीमी नहीं होगी। गर्डर बिछाने का काम तेजी से किया जा रहा है। -दीपक कुमार, उत्तर रेलवे के मुख्यजनसंपर्क अधिकारी 
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. नए ब्रिज निर्माण की मंजूरी 1997-98 में मिली थी।
. रेलवे ने नए कैलाश नगर की साइड में बने ब्रिज के गार्डर आखिरी पिलर तक पहुंचा दिए हैं।
. रेलवे ट्रैक बिछाने के लिए मिट्टी की लेबलिंग का काम पूरा कर लिया गया है। 
. एक फीट की मिट्टी और कंक्रीट की 10 परतें बिछाई जा रही है।
. सीलमपुर तक नई रेल ट्रैक बिछाई जाएगी। सीलमपुर के बाद ट्रेन पुरानी पटरी पर ही दौड़ेगी।
. प्रतिदिन 200 से अधिक ट्रेन गुजरती है। 
. कुल 15 पीलर में 11 पीलर बनकर तैयार हो गया है।
. 14 नंबर स्पैन में 6 नंबर तक के स्पैन में गार्डर लांच कर दिया गया है।
. बाकी बचे 8 गार्डर को बनने की की प्रक्रिया में है, जल्द इसे भी लांच कर दिया जाएगा।
. अगले साल सितंबर महीने तक रेलवे की लाइन बिछा ली जाएगी और ट्रेन चलने लगेगी।
. नए पुल का निर्माण 2004 में शुरू किया गया था।
. 2008 में पुरातत्व विभाग के आपत्ति की वजह से चलते काम रोकना पड़ा।
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