लुधियाना से बिहार जा रही बस से यात्रियों को उतारते जेवर टोलकर्मी व स्थानीय पुलिस।
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यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते लुधियाना से बिहार 230 यात्रियों को लेकर जा रही एक निजी बस शनिवार सुबह जेवर टोल पर एक तरफ झुकने से हादसा ग्रस्त होने से बच गई। बस की क्षमता 60 यात्रियों की थी, लेकिन अधिक कमाई के चक्कर में बाकी यात्री ठूंसे हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए टोल प्रबंधन ने पुलिस की मदद से बस को रोक दिया। इसके बाद इसी बस के ट्रांसपोर्टर से दूसरी बस मंगाकर यात्रियों को भेजा गया। इस दौरान धरनारत किसानों ने टोल प्रबंधन की मदद से यात्रियों को चाय, नाश्ता व खाना भी खिलाया। वहीं, पुलिस कार्रवाई के नाम पर महज ओवरलोडिंग का चालान काटकर चलती बनी।
किसान नेता महेंद्र सिंह चौरोली ने बताया कि सुबह करीब 9 बजे ग्रेटर नोएडा से आगरा की तरफ जा रही एक निजी बस टोल के नजदीक पहुंचकर एक तरफ झुक गई। टोल कर्मियों ने बस को रुकवाया तो बस में 230 यात्री थे। किसानों ने चालक से विरोध जताया तो यात्रियों ने भी समर्थन किया। लोगों ने बताया कि बस रात शुक्रवार रात 8 बजे लुधियाना से बिहार के लिए चली थी। अधिकांश यात्रियों ने ऑनलाइन टिकट बुक कराई थी। भीड़ होने पर यात्रियों ने टिकट रद्द करने व रिफंड की बात की तो संचालकों ने जबरन बस में बैठा लिया और पैसे देने से मना कर दिया। इस कारण यात्रियों को मजबूरी में सफर करना पड़ा।
14 हजार का चालान काटकर पुलिस चलती बनी
यमुना एक्सप्रेसवे पर लंबी दूरी की यात्रा मुहैया कराने के नाम पर निजी बसों का संचालन बेरोकटोक हो रहा है। लुधियाना से जेवर तक बस की जांच कहीं नहीं हुई। इस मामले में बस के परमिट, फिटनेस आदि के बारे में पुलिस ने चुप्पी साध ली। किसानों के विरोध के बाद पुलिस ने सिर्फ 14 हजार रुपये का ओवरलोडिंग का चालान काटकर बस को रवाना कर दिया।
नियम ताक पर रखकर दौड़ रहीं निजी बसें
यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते दिल्ली-एनसीआर के अलावा पंजाब, हरियाणा से कई ट्रांसपोर्टरों की बसें संचालित हो रही हैं। इनमें नियमों को ताक पर रखकर यात्रियों को गंतव्य तक ले जाया जाता है। कार्रवाई से बचने के लिए अधिकांश बसें रात के समय यमुना एक्सप्रेसवे से गुजरती हैं। परिवहन व पुलिस विभाग इससे अनजान बना हुआ है। हालांकि, कुछ समय पूर्व नोएडा में अभियान चलाकर ऐसी कई बसों को जब्त किया गया था, लेकिन स्थिति फिर से पुराने ढर्रे पर लौट आई।