ग्रेटर नोएडा। बीते साल कोरोना काल में अपने कामों के दम पर खुद को प्रदेश में अव्वल साबित करने वाले राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में लचर व्यवस्था व लापरवाही के कारण संक्रमित महिला ने तड़प-तड़प कर अपनी कार में ही दम तोड़ दिया। बृहस्पतिवार को उपचार कराने अस्पताल पहुंची महिला की तबीयत लगातार बिगड़ते देखने के बावजूद संवेदनहीन डॉक्टरों ने उसे भर्ती करना तो दूर जांच की भी जहमत नहीं उठाई। यही हाल शुक्रवार को भी रहा। कई मरीज ऑक्सीजन लगाकर वेटिंग एरिया में इंतजार करते दिखाई दिए, लेकिन उन्हें शाम तक भर्ती नहीं किया गया।
बीटा दो सेक्टर निवासी जागृति गुप्ता को जिम्स लेकर पहुंचे सचिन कुमार ने आरोप लगाया कि कार में करीब तीन घंटे तक मरीज तड़पती रही। परिजन तुरंत उपचार देने की गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई डॉक्टर देखने नहीं आया, न ही अस्पताल में भर्ती किया गया। जब जागृति की जान चली गई तो डॉक्टर आए और मृत घोषित कर चले गए। डॉक्टरों ने शव को मोर्चरी तक भिजवाने की व्यवस्था भी नहीं की। अस्पताल में 13 बेड खाली पड़े थे। इसके बाद भी डॉक्टर बेड खाली न होने का बहाना बनाकर मरीज को भर्ती करने से इनकार करते रहे। शहर के कई अस्पतालों के चक्कर काटकर वह जिम्स पहुंचे थे।
उन्हें जानकारी मिली थी कि जिम्स में कुछ बेड खाली हुए हैं। यहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने बेड न होने का बहाना बनाकर गुमराह किया। जब डिस्चार्ज मरीजों की संख्या के बारे में पूछा गया तो डॉक्टर आगबबूला होकर मरीज को कहीं और ले जाने की बात कहने लगे। सचिन ने जिम्स प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
महिला मरीज की तबीयत ज्यादा खराब थी। अत्यधिक संक्रमित होने के कारण उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों पर लगाए आरोप निराधार हैं। -ब्रिगेडियर डॉ राकेश गुप्ता, निदेशक जिम्स ग्रेटर नोएडा
आंकड़ों के डर से भर्ती नहीं कर रहे कम ऑक्सीजन स्तर वाले मरीज
जिले में संक्रमित मरीजों का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। 85 से कम ऑक्सीजन स्तर वाले मरीजों को बेड खाली होने के बावजूद अस्पताल भर्ती करने से मना कर रहे हैं। कम ऑक्सीजन स्तर वाले मरीज जल्दी रिकवरी नहीं कर पाते हैं, इस वजह से अधिकांश मामलों में मरीज की मौत हो जाती है। अस्पताल व स्वास्थ्य विभाग को इस बात का खतरा भी सताता है कि उनके यहां मरीजों की मौत का ग्राफ बढ़ न जाए। इस तरह की स्थिति जिले के सभी कोविड अस्पतालों में है। जागृति का भी मामला इसी तरह का था। जागृति का ऑक्सीजन का स्तर 35 तक पहुंच गया था। इस मामले में सीएमओ डॉक्टर दीपक ओहरी से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।