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Noida News: जमीन और फ्लैट दिलाने के नाम पर महिला से 26 लाख की धोखाधड़ी

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बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने महिला की शिकायत पर दर्ज किया केस
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माई सिटी रिपोर्टर

ग्रेटर नोएडा। जमीन और फ्लैट के लेनदेन के बहाने 26 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। ग्रेटर नोएडा निवासी सरोज भाटी और उनकी पुत्री शिवगी भाटी ने अशोक भारद्वाज, विशाल बंसल और विजयपाल चौहान पर धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप लगाते हुए बीटा-2 कोतवाली में केस दर्ज कराया है।
तहरीर के अनुसार, वर्ष 2013 में सरोज भाटी ने अपने खेत का बैनामा मैसर्स वीए इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के जरिये विजय अरोड़ा से किया था। उस समय जमीन की कुल कीमत में 26 लाख रुपये दो फ्लैटों की कीमत के रूप में तय किए गए थे। विजय अरोड़ा ने फ्लैट देने का प्रमाणपत्र भी जारी किया था।
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मार्च 2025 में आरोपियों ने सरोज भाटी से कहा कि 26 लाख रुपये कंपनी को मिल चुके हैं। बदले में फ्लैट की रजिस्ट्री करानी होगी। भाटी फार्म हाउस में 28 मार्च 2025 को 13 लाख रुपये दुष्यंत भाटी के खाते से और 13 लाख रुपये पीड़ित के खाते से मिलाकर कुल 26 लाख रुपये बैंक में ट्रांसफर करा लिए। जबकि कंपनी का वास्तविक खाता आईडीएफसी बैंक में था।
पीड़ित ने आरोप लगाया है कि अशोक भारद्वाज, विशाल बंसल और विजयपाल चौहान एक गैंग बनाकर लोगों से ठगी कर रहे हैं। यह लोग कंपनी मैसर्स वीए इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर अलग फर्जी खाते खोलकर करोड़ों रुपये हड़प चुके हैं। कानपुर में भी इनके खिलाफ फर्जी दस्तावेजों की शिकायत दर्ज है। उन्हें जानबूझकर असली जानकारी छिपाकर ठगा गया है।

रियल एस्टेट कंपनी में हेराफेरी का आरोप
वीए इन्फ्रावेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में करोड़ों रुपये की हेराफेरी और फर्जीवाड़े के मामले कंपनी के डायरेक्टर वरदान अरोड़ा ने केस दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि बड़े भाई कंपनी के चेयरमैन और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता विपुल अरोड़ा की मृत्यु नौ नवंबर 2023 को हो गई थी। विपुल अरोड़ा को आरोपी अशोक भारद्वाज और विशाल बंसल द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। जिससे उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। उनकी मौत के बाद सुनियोजित साजिश के तहत कंपनी पर कब्जे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
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वरदान अरोड़ा का कहना है कि आरोपी अशोक भारद्वाज, विशाल बंसल, विजयपाल चौहान, सीए अर्पित यादव समेत अन्य लोगों ने मिलकर कंपनी के दस्तावेज और फ्लैट खरीदारों की फाइलें चोरी कर लीं। फर्जी दस्तावेज बनाकर कंपनी की बिल्डिंग टावर-ए के 80 फ्लैटों को किराये पर चढ़ा दिया। बिना अनुमति के विशाल बंसल को तीसरा डायरेक्टर और विजयपाल चौहान को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नियुक्त कर दिया गया।
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