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शहीद इंस्पेक्टर की पत्नी को क्यों नहीं दी ओएसडी की नौकरी

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ग्रेटर नोएडा। गोरखपुर स्थित एक होटल में कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या के बाद उनकी पत्नी को मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण में ओएसडी की नौकरी का आश्वासन दिया है। इस पर स्याना हिंसा में शहीद इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की पत्नी रजनी सिंह ने कहा कि पति की मौत की भरपाई नौकरी से नहीं हो सकती, फिर भी किसी महिला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह बेहतर कदम है, लेकिन उन्होंने सवाल किया कि कानून व्यवस्था कायम रखने के दौरान हिंसा में उनके पति की हत्या की गई। इसके बावजूद उन्हें अब तक ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) की नौकरी क्यों नहीं दी गई।
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ग्रेनो वेस्ट की गौड़ सिटी सोसाइटी निवासी रजनी सिंह ने बताया कि उनके पति इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह दिसंबर 2018 में बुलंदशहर के स्याना कोतवाली प्रभारी थे। उस दौरान गोकशी को लेकर चिंगरावठी पुलिस चौकी के पास बवाल हुआ। उनके पति जान की परवाह किए बिना हिंसा को रोकने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। बवाल के दौरान छात्र सुमित की भी गोली लगने से मौत हुई थी। अब, गोरखपुर में कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या का आरोप पुलिसकर्मियों पर लगा है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने उनकी पत्नी मीनाक्षी गुप्ता को कानपुर प्राधिकरण में ओएसडी की नौकरी देने की घोषणा की है। यह अच्छा कदम है, लेकिन उन्हें सरकारी नौकरी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि उनके बेटे को एएसआई की नौकरी के लिए कहा है, लेकिन इससे अच्छा पैकेज निजी नौकरी में मिल रहा है। उन्होंने मांग की कि उन्हें या उनके बेटे को ओएसडी की नौकरी दी जानी चाहिए।
21 अक्तूबर को मिलना है पराक्रम पदक
रजनी सिंह ने बताया कि 21 अक्तूबर को पुलिस शहीद दिवस पर पति को पराक्रम पदक दिया जाएगा। उन्हें लखनऊ पुलिस मुख्यालय से इसकी जानकारी दी गई है और मुख्यमंत्री यह पदक देंगे। वह लखनऊ जाकर सीएम को लिखित पत्र देकर ओएसडी की नौकरी की मांग करेंगी।
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