नोएडा। जन्मजात और अनुवांशिक रोग देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा बोझ बन रहे हैं। कारगर अनुवांशिक परीक्षण एवं परामर्श सेवाओं की जरूरत को समझते हुए सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की शुरुआत की गई है। अब गौतमबुद्ध नगर ही नहीं बल्कि पश्चिमी यूपी के जनपद के रोगियों को दिल्ली और लखनऊ जाने की जरूरत नहीं होगी। चाइल्ड पीजीआई में भूतल स्थित कमरा नंबर-1 में सोमवार से शुक्रवार तक ओपीडी सेवाएं भी शुरू कर दी गई हैं।
यह प्रदेश का दूसरा और पश्चिमी यूपी का पहला मेडिकल जेनेटिक्स विभाग है। इससे पहले यह सुविधा लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में उपलब्ध है। चाइल्ड पीजीआई के इस नव निर्मित विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में डॉ. मयंक निलय को शामिल किया गया है। इससे पहले वह लखनऊ के एसजीपीजीआई के जेनेटिक्स विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में मॉलिक्यूलर मेडिसिन और दुर्लभ रोग चिकित्सा विज्ञान पर आधारित उनके शोध प्रकाशित हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि यह विभाग मेटाबोलिज्म की जन्मजात त्रुटियां, दुर्लभ विकारों के लिए नवजात की जांच, स्क्रीनिंग, भ्रूण-शव परीक्षण प्रक्रिया (फीटल ऑटोप्सी), प्रसव पूर्व निदान के लिए एमनियोसेंटेसिस/कोरियोनिक विलस सैंपलिंग, प्रसव पूर्व और पेरी-कॉन्सेप्शनल काउंसलिंग (रेकर्रेंट सहज गर्भपात/ खराब प्रसूति इतिहास) के निदान और प्रबंधन पर काम करेगा। चाइल्ड पीजीआई की निदेशक डॉ. ज्योत्सना मदान ने बताया कि मेडिकल जेनेटिक्स विभाग बहुत जल्द विभिन्न साइटोजेनेटिक और आणविक परीक्षण शुरू करेगा। आनुवंशिक विकारों के निदान और प्रबंधन के अलावा, विभाग अनुसंधान, शिक्षाविदों और चिकित्सकों के प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से शामिल होगा। यह नया केंद्र कैंसर आनुवंशिकी और भ्रूण चिकित्सा के लिए एक आशा की किरण होगा।