अहम है कि उत्तर प्रदेश में सात चरणों में विधानसभा चुनाव संपन्न होना है। 10 फरवरी को गौतमबुद्ध नगर की नोएडा, दादरी और जेवर के साथ 58 सीटों चुनाव संपन्न हो गया। लेकिन यहां का नतीजा प्रदेश में सात चरणों का चुनाव संपन्न होने के बाद 10 मार्च को आएगा और तब तक प्रत्याशी, उनके समर्थक व आमजन में यह जिज्ञासा बनी रहेगी कि उनका अगला विधायक कौन है।
वेस्ट यूपी में प्रथम चरण में मतदान होने के कारण जिले के तीनों सीट पर नतीजों के लिए एक माह का इंतजार करना होगा। हालांकि जीत का गुणा-भाग मतदान के बाद से ही शुरू हो गया है। आलम यह है कि चाय, पान की दुकान गांव की चौपाल, सेक्टर और सोसाइटी से लेकर सोशल मीडिया तक सभी जगह हार-जीत का हिसाब शुरू हो गया है। हर प्रमुख पार्टी के उम्मीदवार जातिगत आंकड़े पेश कर अपनी पसंद के प्रत्याशियों की जीत का हिसाब लगा रहे हैं। कड़े मुकाबले में रहे उम्मीदवारों के समर्थक और करीबी इसी तरह से आंकड़े पेश कर जीत का दावा कर रहे हैं।
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अहम है कि उत्तर प्रदेश में सात चरणों में विधानसभा चुनाव संपन्न होना है। 10 फरवरी को गौतमबुद्ध नगर की नोएडा, दादरी और जेवर के साथ 58 सीटों चुनाव संपन्न हो गया। लेकिन यहां का नतीजा प्रदेश में सात चरणों का चुनाव संपन्न होने के बाद 10 मार्च को आएगा और तब तक प्रत्याशी, उनके समर्थक व आमजन में यह जिज्ञासा बनी रहेगी कि उनका अगला विधायक कौन है। जिस सीट पर करीबी मुकाबले हुए और प्रत्याशियों में कांटे टक्कर हुई है।
वहां के समर्थक ये हिसाब लगाने में जुटे हैं कि उनके समर्थकों को किस जाति के कितने वोट मिले। वहीं, दूसरे प्रत्याशियों के मिले वोट का भी अनुमान लगाया जा रहा है। जिससे वह 10 मार्च से ही पहले गुणा-भाग कर अपने प्रत्याशी की जीत सुनिश्चत कर सकें। करीबी मुकाबले ने हिसाब किताब लगाने वाले लोगों को उलझा दिया है। वह किसी न किसी तरह से आंकड़ों की बाजीगरी कर जीत के समीकरण गिना रहे हैं।
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बदले समीकरण, भितरघात और सेंधमारी से आकलन मुश्किल
इस बार जेवर और दादरी विधानसभा में चुनावी समीकरणों में काफी बदलाव हुआ है। इसके चलते किसी भी प्रत्याशी की जीत-हार का हिसाब लगाना आसान नहीं है। स्थानीय मुद्दों के अलावा प्रदेश और राष्ट्रीय मुद्दे व स्थानीय नेताओं से नाराजगी व विकास के काम आदि पर मतदाताओं का पूरा ध्यान रहा है। यही कारण है कि पूर्व के चुनावों की अपेक्षा इस बार भितरघात और एक दूसरे के वोट बैंक में सेंधमारी अधिक हुई है। यही कारण है इस बार जीत का अंतर और जीतने वाले प्रत्याशी को मिलने वाली वोटों की संख्या भी कम हो सकती है।