नोएडा। सेक्टर-93ए एमराल्ड कोर्ट स्थित 40 मंजिला ट्विन टावर गिराने का काम सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई समयसीमा में नहीं हो पाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गिराने के लिए तीन माह का समय दिया था, लेकिन अब सिर्फ 20 दिन बाकी बचे हैं, जबकि कार्रवाई के नाम पर अभी तक टावर गिराने के लिए एजेंसी तक की चयन प्रक्रिया नहीं हो पाई है। ऐसे में प्राधिकरण अधिकारी अब सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। इसमें ट्विन टावर को लेकर अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा दिया जाएगा। आदेश के तहत ट्विन टावर को 30 नवंबर तक गिराना है। सूत्रों की माने तो प्राधिकरण अधिकारी इस देरी के लिए सुपरटेक के सिर ही ठीकरा फोड़ने की तैयारी में हैं।
टावर गिराने में कम से कम पांच माह लगेंगे। इसमें दो माह कार्ययोजना तैयार करने और तीन माह सुरक्षित तरीके से गिराने में लगेंगे। सुपरटेक की ओर से अब तक एक्सपर्ट डेमोलिशन एसोसिएशन के प्रेसिडेंट मोहन रामनाथन, ब्रोक के कंट्री हेड मनमोहन कृष्णा, एग्जिक्यूड प्राइवेट लिमिटेड के हेड आनंद शर्मा, जेनेसिस इंजीनियरिंग के हेड पीयूष गांधी और एडिफिस इंजीनियरिंग के पार्टनर उत्कर्ष मेहता से टावर गिराने पर चर्चा हुई है। इसके अलावा सीबीआरआई के निदेशक डॉ. गोपाल कृष्णन, नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) के सीएमडी एके मित्तल भी इस काम में सहयोग कर रहे हैं। सुपरटेक के मुताबिक एक्सपर्ट मोहन रामनाथन ने भी कहा कि इसका स्ट्रक्चर बेहद यूनिक है और सुरक्षित तरीके से इसे गिराने के लिए कम से कम दो माह कार्ययोजना बनाने में लगेंगे।
अब तक की कवायद
- रुड़की की सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) की टीम भी ट्विन टावर का निरीक्षण कर चुकी है।
- टावर को गिराने के लिए अब तक कई अन्य एजेंसी भी निरीक्षण कर चुकी हैं। हालांकि, किसी भी कंपनी ने मॉडल प्रस्तुत नहीं किया है।
- इसी मामले में लखनऊ के विजिलेंस थाने में प्राधिकरण के 30 अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।