नोएडा (संजय शिशौदिया)। यूपीआई से लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाने वाले साइबर ठग झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को दस से बीस हजार रुपये का लालच देकर खाते खुलवाते हैं। खाते की चेकबुक, एटीएम कार्ड साइबर ठग पास रख लेते हैं। किसी भी साइबर ठगी के बाद जब तक पुलिस कार्रवाई करना शुरू करती है, ठगी की इस रकम को एक खाते से दूसरे, तीसरे... करीब बीस से ज्यादा खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। ठग ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि पुलिस इन बैंक खातों के पीछे ही घूमती रहे और ठगों तक न पहुंच पाए।
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि यूपीआई के माध्यम से लोगों के खातों में सेंध लगाने वाले साइबर ठगों की जांच में ज्यादातर चौंकाने वाली बात ही सामने आती है। ज्यादातर साइबर ठग दस-बीस हजार का लालच देकर झुग्गी-झोपड़ी, ठेला-पटरी वालों के खाते खुलवा लेते हैं। जैसे ही किसी की रकम एक खाते में ठग ट्रांसफर करता है, वैसे ही उस रकम को तत्काल अन्य खाते में भेज देता है। पुलिस आखिरी खाते तक पहुंचती तो है, लेकिन इस काम में समय लगता है, क्योंकि प्रत्येक खाते की जानकारी के लिए पुलिस संबंधित बैंक को ई-मेल भेजती है। एक से चार घंटों में एक ई-मेल का जवाब आता है। ऐसे में साइबर ठग किसी एटीएम से रकम निकाल चुका होता है।
पश्चिम बंगाल, जामताड़ा और राजस्थान की पुलिस नहीं करती सहयोग
पुलिस के साइबर एक्सर्ट बताते हैं कि कई बार वह आरोपियों का पता निकालने में कामयाब भी हो जाते हैं। आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया जाता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में वहां की स्थानीय पुलिस यूपी पुलिस का साथ नहीं देती। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, झारखंड की जामताड़ा और मेवात से लगे राजस्थान की पुलिस तो बिलकुल सहयोग नहीं करती।