ट्विन टावर के अवैध निर्माण में बिल्डर-प्राधिकरण गठजोड़ में अग्निशमन विभाग भी शामिल रहा। टावरों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने वाले तीन तत्कालीन सीएफओ के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। कोतवाली फेज टू में तत्कालीन मुख्य अग्निशमन अधिकारी (अब सेवानिवृत्त) महावीर सिंह, राजपाल त्यागी व आईएस सोनी को नामजद किया गया था। डीआईजी फायर सर्विस की अध्यक्षता वाली जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तीनों पर कार्रवाई हुई थी।
इस प्रकरण में शासन के आदेश पर अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त संजीव मित्तल की अध्यक्षता में जिम्मेदारी तय करने के लिए कमेटी का गठन किया गया था। इस मामले की जांच में सामने आया था कि ग्रुप हाउसिंग भूखंड संख्या-जीएच-4, सेक्टर-93ए का आवंटन और मानचित्र स्वीकृति वर्ष 2004 से 2012 के मध्य की थी।
मानचित्र स्वीकृति वर्ष 2005, 2006, 2009 और 2012 में दी गई। अवैध रूप से स्वीकृत मानचित्रों के आधार पर हुए निर्माण को अग्निशमन विभाग ने लापरवाही बरतते हुए एनओसी दे दी थी। मामले में अग्निशमन मुख्यालय में तैनात डीआईजी की एक समिति ने जांच की तो सुपरटेक ट्विन टावर को एनओसी देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को चिह्नित कर लिया गया था।
वरिष्ठ नागरिक बोले- न्याय की जीत
बिल्डर की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाकर इतनी बड़ी कंपनी को घुटनों पर लाना आसान नहीं था, लेकिन एमरॉल्ड सोसाइटी के वरिष्ठ नागरिकों ने इस चुनौती को स्वीकार किया। 12 साल लंबी लड़ाई के बाद इस मामले में भ्रष्टाचार के सिर को प्राधिकरण के तन से जुदा करने में इन्हें कामयाबी भी मिली। इस लड़ाई में यूबीएस तेवतिया, एसके शर्मा, रवि बजाज, वशिष्ठ शर्मा, गौरव देवनाथ, आरपी टंडन, अजय गोयल ने अग्रणी भूमिका निभाई। आज इनकी मेहनत की रंग लाई और न्याय की जीत हुई।
...तो आज ये दिन देखना न पड़ता
सुपरटेक के खिलाफ कानूनी लड़ाई का नेतृत्व करने वाले सीआईएसएफ के डीआईजी पद से सेवानिवृत्त यूबीएस तेवतिया 79 साल के हैं। एमराल्ड कोर्ट सोसाइटी की आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष भी हैं। तेवतिया कहते हैं कि प्राधिकरण अवैध इमारतों के निर्माण में मददगार नहीं बनता तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता। बिल्डर-प्राधिकरण के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं थी, लेकिन हमने ठान लिया था कि लड़ेंगे, हार नहीं मानेंगे। आज नतीजा आपके सामने है।
सबसे सुंदर सोसाइटी की सूरत बिगाड़ी
मई 2014 में सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई में शामिल होने वाले अजय गोयल बताते हैं कि बुढ़ापे के दिन चैन से बिताने के लिए एमराल्ड कोर्ट में घर खरीदा था। उस समय शहर की सबसे सुंदर सोसाइटी थी, लेकिन बिल्डर ने अवैध निर्माण कर इसकी सूरत बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लंबी लड़ाई थी और इसे लड़ना बड़ी चुनौती था। सात साल की कानूनी लड़ाई के बाद जीत से खुशी मिली है, लेकिन टावर गिरने के बाद की चुनौतियां चिंतित भी कर रही हैं।
ठोस दस्तावेज से दी मजबूत टक्कर
सुपरटेक संग लड़ाई में सबूतों के आधार पर दस्तावेज तैयार कर मजबूत टक्कर देने का काम 65 साल के रवि बजाज ने किया। आयकर विभाग से सेवानिवृत्त बजाज आरडब्ल्यूए के सदस्य भी रहे।
दिल्ली से इलाहाबाद की दौड़ में नहीं मानी हार
सेवानिवृत्त होने के बाद जब लोग आराम की जिंदगी जीने की सोचते हैं, उस उम्र में सोसाइटी के वरिष्ठ नागरिक कोर्ट, कचहरी और प्राधिकरण के चक्कर काट रहे थे। इन्हीं में 74 साल के एसके शर्मा भी शामिल रहे। शर्मा एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष हैं। इन्होंने इलाहाबाद से लेकर दिल्ली तक की दौड़ लगाई।