सुपरटेक के एपेक्स और सियान टावर में 900 से अधिक फ्लैटों का निर्माण किया जाना था। इनमें 711 फ्लैटों की बुकिंग हो चुकी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के बाद बुकिंग अमाउंट और 12 प्रतिशत ब्याज की रकम मिलाकर 652 निवेशकों के दावे सेटल कर दिए गए। इनमें 300 से अधिक ने रिफंड का विकल्प अपनाया, जबकि बाकी ने मार्केट या बुकिंग वैल्यू और ब्याज की रकम जोड़कर जो राशि बनी उसके अनुसार दूसरी परियोजनाओं में प्रॉपर्टी ले ली। प्रॉपर्टी की कीमत कम या ज्यादा होने पर पैसा रिफंड किया या अतिरिक्त रकम जमा कराई गई।
ट्विन टावर के 59 निवेशकों को अभी तक रिफंड नहीं मिला है। 25 मार्च को सुपरटेक के इंसोल्वेंसी में जाने से रिफंड की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। 14 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड दिया जाना बाकी है। इंसोल्वेंसी में जाने के बाद मई में कोर्ट को बताया गया कि सुपरटेक के पास रिफंड का पैसा नहीं है।
प्राधिकरण के चेहरे ही नहीं, मुंह, नाक, आंख से टपकता है भ्रष्टाचार
सुपरटेक की एमराल्ड कोर्ट परियोजना पर सुनवाई करते हुए छह अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकरण में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सख्त टिप्पणी की थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि प्राधिकरण भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ है। प्राधिकरण के केवल चेहरे से ही नहीं, बल्कि उसके मुंह, नाक, आंख सभी से भ्रष्टाचार टपकता है। नोएडा प्राधिकरण निजी प्राधिकरण नहीं सरकारी प्राधिकरण है।
खुद लिया और दूसरों को दिलाया रिफंड
आईटी सेक्टर में काम करने वाले पंकज कौशिक ने एपेक्स और सियान टावर में दो फ्लैट बुक कराए थे। 2012 में मामला हाईकोर्ट में जाने के बाद परियोजना का काम बंद हो गया। दो साल बाद 2014 में हाईकोर्ट ने टावरों को ध्वस्त करने के आदेश जारी कर दिए।
इसके बाद पंकज ने रिफंड के लिए जद्दोजहद शुरू कर दी। कोर्ट का रुख किया। तीन साल की भागदौड़ के बाद 2016 में रिफंड मिल गया। इस बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात कई सैन्यकर्मियों ने उनसे संपर्क साधा, क्योंकि उन्होंने भी ट्विन टावर में फ्लैट बुक कराए थे। पंकज ने अपनी लड़ाई में इन्हें भी शामिल किया और रिफंड दिलाने में मदद की।
आरके अरोड़ा ने 27 साल में खड़ीं की 34 कंपनियां
ट्विन टावर के अवैध निर्माण को लेकर सवालों के घेरे में आई सुपरटेक के मालिक आरके अरोड़ा का सफरनामा दिलचस्प है। 1995 में कंपनी की शुरुआत हुई और करीब 27 साल में 34 कंपनियां खड़ी कर दीं। सिविल एविएशन, कंसलटेंसी, प्रिंटिंग, फिल्म्स, हाउसिंग फाइनेंस, कंस्ट्रक्शन आदि कंपनियां इनमें शामिल हैं। मेरठ, नोएडा, ग्रेनो, यमुना प्राधिकरण क्षेत्र और दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के करीब 12 शहरों में सुपरटेक के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट लांच हो चुके हैं। आरके अरोड़ा की पत्नी और बेटा भी कारोबार में हिस्सेदार हैं।
उन्होंने कारोबार केवल रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने मौजूदा दौर के लगभग हर छोटे-बड़े धंधे में हाथ आजमाया है। मतलब, एयर ट्रांसपोर्ट शुरू करने के लिए आरके अरोड़ा और उनके सहयोगियों ने 2013 में सुपरटेक एविएशन प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की। इस कंपनी ने एक हवाई जहाज भी खरीदा। हालांकि, बाद में यह प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया। बिजली उत्पादन और वितरण से लेकर बिलिंग से जुड़े कारोबार में भी उन्होंने कदम रखा।
विधायक को एडिफिस के मालिक ने समझाई प्रक्रिया
शनिवार दोपहर नोएडा विधायक पंकज सिंह ट्विन टावर की साइट पर पहुंचे। यहां उन्होंने सुरक्षित ध्वस्तीकरण को लेकर कई निर्देश दिए। एडिफिस इंजीनियर के मालिक जिगर चड्डा ने उन्हें पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया। विधायक भी तैयारियों से संतुष्ट दिखे। उन्होंने कहा कि सब कुछ नियम कानून के मुताबिक हो रहा है।