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ट्विन टावर मामला: अमेरिका-ब्रिटेन के विशेषज्ञ भी नहीं निकाल पाए हल

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नोएडा। सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट स्थित ट्विन टावर गिराने के मामले का अमेरिका-ब्रिटेन से जुड़े विशेषज्ञ भी हल नहीं निकाल पाए। सुपरटेक की ओर से चयनित एजेंसियों के यह सहयोगी बैठक में ऑनलाइन शामिल रहे। बुधवार को प्राधिकरण के साथ बैठक में कोई सटीक कार्ययोजना पेश नहीं हो सकी। ऐसे में प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी ने अब बिल्डर को बेहतर एजेंसियों के साथ कार्ययोजना लेकर आने को कहा है।
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बिल्डर की ओर से चयनित एजेंसियां जेनेसिस और एडिफिस के अलावा इस मामले के विशेषज्ञ सलाहकार मोहन रामनाथन, सीईओ रितु माहेश्वरी समेत दूसरे अन्य अधिकारी ऑनलाइन बैठक से जुडे़। बैठक में एजेंसियाें की ओर से ट्विन टावर गिराने को लेकर मंथन किया गया, लेकिन बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद सीईओ ने बिल्डर को निर्देश दिया कि वह ज्यादा से ज्यादा एजेंसियों से बातचीत करे। साथ ही, जिन एजेंसियों से बिल्डर खुद संतुष्ट हो, उनकी कार्ययोजना प्राधिकरण में जमा करे। सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट समेत अन्य विशेषज्ञ अधिकारी कार्ययोजना की जांच करेंगे। इसके बाद अंतिम निर्णय होगा। ट्विन टावर गिराने की आखिरी तारीख 30 नवंबर है।
एक साइड में झुकाकर गिराने की संभावना
एजेंसियां कार्ययोजना तैयार करने के लिए और समय मांग रही हैं। चर्चा यह भी है कि ट्विन टावर को ब्लास्ट से एक ओर झुकाकर गिराने पर सहमति बन सकती है। हालांकि, इसके लिए दूसरी अन्य संभावनाओं पर भी गौर करना पड़ेगा। टावर की ऊंचाई करीब 96 मीटर है। इसके आधे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर भी उपाय करने होंगे।
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ट्विन टावर से हटाई गई सील
कोर्ट के आदेश पर ट्विन टावर को सील किया गया था, लेकिन जिन एजेंसियों को यहां बुलाया जा रहा है उनकी ओर से मौके पर जायजा लेने की बात कही जा रही थी। ऐसे में प्राधिकरण की ओर से सीलिंग हटा ली गई है। अब एजेंसियों के लिए रास्ता साफ हो गया है।
सुपरटेक एक सप्ताह में दायर कर सकता है पुनर्विचार याचिका
ट्विन टावर गिराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर सुपरटेक एक सप्ताह में पुनर्विचार याचिका दायर कर सकता है। फैसले में संशोधन के लिए पहले दिए गए प्रार्थना पत्र के खारिज होने के बाद सुपरटेक यह कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों का कहना है कि ट्रिवन टावर गिराने के फैसले के खिलाफ सुपरटेक फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है। एक सप्ताह में पुनर्विचार याचिका दायर करने के संकेत मिले हैं।
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