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फर्श पर बैठकर ले रहे ज्ञान, कल का भविष्य कैसे भरेगा उड़ान

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कुरैब गांव स्थित सरकारी स्कूल में फर्श पर बैठकर ज्ञान अर्जित करते बच्चे। - फोटो : Grnoida
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जेवर। विकास खंड के कुरैब गांव में विभागीय लापरवाही से सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को उपयुक्त शिक्षा नहीं मिल पा रही है। गांव के परिषदीय स्कूल में वर्तमान में 679 बच्चे अध्ययनरत हैं। इन्हें शिक्षा देने के लिए प्रधानाध्यापक सहित कुल तीन शिक्षकों की तैनाती की गई है। पहली से लेकर आठवीं तक के स्कूल में अगर दो कक्षाओं को एक साथ पढ़ाया तो भी कम से कम चार अध्यापकों की आवश्यकता है। वहीं, संसाधन नहीं होने से बच्चों को फर्श पर बैठकर ज्ञान अर्जित करना पड़ रहा है। खास बात तो यह है कि नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण में इस गांव की भूमि का अधिग्रहण होना है। ऐसे में कल का भविष्य कैसे उड़ान भरेगा, यह सवाल उठना लाजिमी है।
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कुरैब स्थित सरकारी स्कूल में गांव और इसके माजरा नगला जहानु के बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। एक ओर जिले के अन्य सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम हो रही है तो वहीं कुरैब के ग्रामीणों ने सरकारी स्कूल 679 बच्चों का दाखिला स्कूल में कराया है। इन बच्चों का भविष्य सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने मात्र तीन अध्यापकों को जिम्मेदारी दी है। स्कूल में तैनात हरीशंकर शर्मा का जनता इंटर कॉलेज जेवर में प्रवक्ता के पद पर चयन हो चुका है। वह भी जल्द स्कूल को अलविदा कह सकते हैं। इसके बाद अन्य शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी। ऐसा नहीं है कि शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी है, लेकिन कोई भी शिक्षक देहात क्षेत्र के स्कूलों में तैनाती नहीं चाहता है। इससे बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ना लाजमी है। वहीं, शिक्षा विभाग जानकर भी अनजान बना है।
बिसरख ब्लॉक में तैनाती के लिए लगाते हैं जोर
सूत्रों की माने तो शिक्षकों को तीन विकास खंडों में तैनाती दी जाती है। बारह से आने वाले ज्यादातर शिक्षकों की पहली पसंद बिसरख ब्लॉक है। बिसरख ब्लॉक के सरकारी स्कूल ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में पड़ते हैं। ऐसे में दिल्ली नोएडा व गाजियाबाद में रहने वाले शिक्षकों को आने जाने में आसानी होती है। शिक्षकों की दूसरी पसंद दादरी ब्लॉक है। वहीं जेवर विकास खंड सबसे दूर का है। इसकी वजह से कोई अध्यापक वहां जाने के लिए तैयार नहीं होता। ज्यादातर शिक्षक बिसरख ब्लॉक में तैनाती के लिए जोर लगाते हैं।
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हाशिये पर पहुंचीं सरकारी योजनाएं
सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकार सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों पर भारी भरकम बजट खर्च कर रही है। सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति से लेकर शिक्षा के स्तर को सुधारने पर जोर दिया जा रहा है। इसे देखते हुए अभिभावकों ने तो सरकारी स्कूलों में बच्चों का दाखिला तो करा दिया, लेकिन शिक्षा विभाग जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है। इससे सरकारी योजनाएं हाशिये पर पहुंच गई हैं।
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