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तीन कृषि कानून को वापस लेने की घोषणा पर मिठाई बांटी

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नोएडा/ग्रेटर नोएडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद जिले में कई स्थानों पर किसानों ने मिठाइयां बांटकर खुशी जताई। किसानों ने इसे जीत करार दिया। किसानों का कहना है कि संयुक्त मोर्चा की बैठक में इसे लेकर जो भी आगे रणनीति बनती है, उसके मुताबिक फैसला लिया जाएगा। कुछ किसान कानूनों के लोकसभा में रद्द होने तक धरने को जारी रखने पर जोर दे रहे हैं। वहीं, बादलपुर में अखिल भारतीय किसान सभा के पदाधिकारी एकत्र हुए मिठाई बांटी। किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि किसानों का ऐतिहासिक आंदोलन रहा है।
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भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर धरना, रास्ता रोकने, दिल्ली कूच करने समेत आंदोलन करते रहे हैं। उनके साथ कई किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया था। जेवर व लुहारली टोल पर जाम लगाकर वाहनों को मुफ्त निकालने, पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर जाम लगाने और भारत बंद में शामिल होकर इस संगठन के किसान नेता सक्रिय रहे। भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी सुनील प्रधान ने बताया कि प्रधानमंत्री की घोषणा की जानकारी होने पर संगठन के पदाधिकारी गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे। यहां पर होने वाली बैठक में शामिल होने और आगे की रणनीति को लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है। शनिवार को भी सुबह दस बजे संयुक्त मोर्चा की बैठक होगी। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
प्रधानमंत्री ने बहुत अच्छी पहल की है। तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा का हम स्वागत करते हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भी कानून बनना चाहिए। - ब्रिजेश भाटी किसान नेता ग्रेटर नोएडा
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किसान हक की लड़ाई लड़ रहे थे। देशभर में किसानों के आंदोलन के बाद सरकार के बैकफुट पर आने के बाद तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया गया है। यह किसानों की जीत है।- नरेंद्र सिंह, किसान दादरी
किसान हक के न्याय के लिए आंदोलन करते हैं। किसानों के सामने सरकार झुकी है। तीनों कृषि कानून को वापस लेने पर ही किसानों का हित हुआ है। सरकार को किसानों ने झुकाया है। - किसान राजकुमार दादरी
किसानों को यह कामयाबी सरकार द्वारा कोई भीख में नही दी गई, बल्कि इस कामयाबी के पीछे आंदोलन में शहीद हुए वे किसान हैं, जिन्होंने करोड़ों किसानों के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे दी। - अमित अवाना, जिलाध्यक्ष किसान एकता संघ युवा
कुछ लोगों ने किसानों को बरगलाया
सांसद डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री के इस फैसले को कुछ लोग हार का नाम दे रहे हैं। ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि प्रधानमंत्री ने किसान हित को देखते हुए यह फैसला लिया है। कृषि कानून किसानों के हित में ही थे, लेकिन कुछ लोगों ने किसानों को बरगलाने का काम किया। ऐसे में किसानों को लंबे समय से आंदोलन करता देख प्रधानमंत्री ने यह फैसला लिया। भाजपा किसानों के हित में काम कर रही थी और आगे भी करती रहेगी। बिचौलियों को किसी कीमत पर किसानों पर हावी नहीं होने दिया जाएगा।
भाजपा का ऐलान चुनावी दांव
सपा के वरिष्ठ नेता सुनील चौधरी ने कहा कि काले कानूनों की वापसी अहंकार की हार है। यह किसानों की जीत है। लोकतंत्र की जीत है। सरकार यह सोच रही है कि दिखावटी माफी मांग कर फिर से या दोबारा सत्ता में आएंगी, लेकिन जनता इन्हें समझती है। इससे पूर्व भी चुनाव से नोट बंदी करके भी पहले ऐसा ही फैसला लिया गया था। इसका परिणाम आज तक जनता भुगत रही है। भाजपा का यह ऐलान चुनावी दांव है। भाजपा की प्राथमिकता किसानों का सम्मान नहीं है यह सब उन्होंने वोट के लिए किया है।
जान देने वाले किसानों को मिले शहीद का दर्जा
आम आदमी पाटी के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र जादौन ने कहा कि जो कृषि कानून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वापस लेने की घोषणा की है, उनका विरोध सबसे पहले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने किया था। आज सत्य की जीत हुई है, किसानों की जीत हुई है। अहंकारी सरकार की हार हुई है। 700 से ज्यादा उन किसानों जिन्होंने आंदोलन के दौरान अपने प्राण गवां दिए उन सभी को शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए।
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