ग्रेटर नोएडा/दादरी/दनकौर/बिलासपुर। यूक्रेन में जंग के बीच फंसे कुछ छात्रों के जल्द ही घर लौटने की उम्मीद है। वहीं कई अभी भी वहीं फंसे हैं। जिले मेें रहने वाले उनके परिजन काफी चिंतित हैं। लगातार संपर्क कर बच्चों को घर लाने की कोशिश कर रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसे छात्रों को हो रही है। काफी छात्र अभी भी बंकरों में बंद हैं। वहां खाने-पीने का सामान तेजी से खत्म हो रहा है। कुछ छात्र हिम्मत दिखाकर घर वापस आने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि कुछ बॉर्डर से वापस हॉस्टल पहुंचे गए हैं। यूक्रेन में फंसे जिले ऐसे ही छात्र-छात्राएं और उनके परिजनों ने ग्राउंड जीरो का हाल बताया। पेश है एक रिपोर्ट :
दोनों बहनों का छूटा साथ, एक अभी भी बॉर्डर पर फंसी
ग्रेटर नोएडा के अस्तौली गांव की दो बहनें आंचल और मोनिका का साथ यूक्रेन-रोमानिया बॉर्डर पर छूट गया। एक बहन रोमानिया पहुंच गई । जबकि दूसरी अभी भी बॉर्डर पर फंसी है। दोनों बहन पिछले पांच दिन से एक दूसरे की हिम्मत बनकर सुरक्षित निकलने का प्रयास कर रही थी। दोनों के अलग हो जाने से परिजन भी परेशान हैं। सोमवार को बॉर्डर पर दोनों बहन लाइन में लगी थी। लाइन से दस-दस लोगों के ग्रुप को रोमानिया की तरफ ले जाया जा रहा था। लाइन में 10वें नंबर पर छोटी बहन मोनिका और 11वें नंबर पर बड़ी बहन आंचल थी। 10 नंबर तक के छात्रों को रोमानिया में प्रवेश दिया गया। बाकी को बॉर्डर पर ही रोक दिया गया है। पिता बिजेंद्र भाटी ने बताया कि रोमानिया बॉर्डर से बुखारेस्ट 550 किमी दूर है। 10 घंटे में बस बच्चों को वहां पहुंचाएगी। दोनों बहनों के अलग होने से काफी परेशान हैं। दोनों बहन को भी एक-दूसरे की चिंता सता रही है। उम्मीद है कि देर शाम आंचल भी बॉर्डर पार कर लेगी। उनके मोबाइल की बैट्री खत्म हो गई है। जिस कारण शाम को उनसे संपर्क टूट गया था।
शेल्टर होम पहुंची संस्कृति, अब घर आने का इंतजार
ग्रेनो वेस्ट की हैबिटेट पंचतत्व सोसाइटी निवासी संस्कृति सिंह यूक्रेन से निकलकर रोमानिया में एयरपोर्ट के पास शेल्टर होम में पहुंच गई है। इससे परिजनों ने राहत की सांस ली है। परिजन संस्कृृति के घर आने का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि मंगलवार को महाशिवरात्रि पर संस्कृति उनके साथ होगी। संस्कृति के पिता उमेश सिंह ने बताया कि शनिवार की रात संस्कृति बड़ी मुश्किल से यूक्रेन से बॉर्डर पार रोमानिया में पहुंची थी। इसमें उसे 18 घंटे लगे, लेकिन उसके कुछ दोस्त बॉर्डर पर छूट गए। रविवार की सुबह 11 बजे से बस में सवार होकर बुखारेस्ट पहुंची। रविवार की देर रात करीब तीन वह शेल्टर होम में पहुंची। जहां उसे खाने और पीने समेत सभी सुविधा मिल रही है। संस्कृति ने अपने पिता को बताया कि यहां पर भारतीय खाना मिल रहा है। कुछ भारतीय नागरिक यहां रहते है। वो भी मदद कर रहे है।
बंकर में मरने से अच्छा है कि घर पहुंचने का प्रयास करें
तुगलपुर गांव निवासी हितेंद्र चेची ने सोमवार को विश्वविद्यालय का बंकर छोड़ दिया है। वह मेट्रो पकड़कर ट्रेन तक पहुंच गया है। वहां से आगे का सफर तय करेगा। हितेंद्र 24 फरवरी से विश्वविद्यालय के अंदर बने बंकर में साथी छात्रों के साथ बंद था। वहां खाने-पीने का सामान खत्म होने लगा था। किसी तरह की मदद नहीं मिल रही थी। सभी छात्रों को कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी। हितेंद्र ने अपने चाचा मनोज चौधरी को बताया कि बंकर में मरने से अच्छा है कि घर पहुंचने का प्रयास करें। इसी लक्ष्य के साथ हितेन्द्र अपने 33 साथियों के साथ निकल गया है। सभी छात्र ट्रेन पकड़कर रोमानिया बॉर्डर की तरफ जा रहे हैं।
पोलैंड बॉर्डर पर लाठीचार्ज होने पर वापस हॉस्टल आ गया मोहित
दादरी क्षेत्र के दुजाना गांव निवासी एमबीबीएस द्वितीय वर्ष का छात्र मोहित नागर यूक्रेन में फंसा हुआ है। वह हॉस्टल में अन्य छात्रों के साथ मदद का इंतजार कर रहा था। बाद में मोहित अन्य छात्रों के साथ पोलैंड बॉर्डर तक पहुंच गया था। लेकिन पोलैंड की फोर्स ने शनिवार रात लाठी चार्ज कर भाग दिया। अब वह फिर से छात्रावास में मदद का इंतजार कर रहा है। मोहित नागर के भाई सोनू नागर एडवोकेट ने बताया कि वर्ष मोहित नागर 2020 के दिसंबर माह में यूक्रेन डैनिलो हलीस्की ल्विव राष्ट्रीय चिकित्सा विश्वविद्यालय में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए गया था। मोहित अन्य छात्रों के साथ जिस छात्रावास में रुका है। उसके पास रूस की सेना ने एयरपोर्ट पर हमला कर दिया। इसके बाद मोहित समेत अन्य कई छात्र भारत आने के लिए कैब की मदद से पॉलेंड बार्डर पर पहुंच गए। यहां वह दो दिन तक भूखे प्यासे मदद का इंतजार करते रहे लेकिन शनिवार को यहां लाठी-चार्ज कर छात्रों को वापस भेज दिया गया। वर्तमान में मोहित यूक्रेन के 8 पशिचना स्ट्रीट स्थित छात्रावास में अन्य छात्रों के साथ रहकर मदद का इंतजार कर रहा है। परिजन का कहना है कि मोहित का एक करीबी गाजियाबाद निवासी साथी भी वहां फंसा है। उसने भारत आने के लिए टिकट बुक कराया हुआ था लेकिन उसी दिन रूस ने हमला कर दिया।
दूतावास से आया फोन, छात्र कर रहा है ट्रेन से आने से इनकार
खारकीव शहर में आसमान से लड़ाकू जहाज व सड़क से गोलियों की आवाजें बंकर तक पहुंच रही हैं। इससे बंकर में रह रहे छात्रों ने ट्रेन से निकलने से इनकार कर दिया है। भारतीय दूतावास के अधिकारी परिजन से बातचीत कर छात्रों को मनाने में जुटे हैं। दनकौर के मूंजखेड़ा निवासी अशोक शर्मा का पुत्र अक्षांक शर्मा भी 60 विद्यार्थियों के साथ इसी बंकर में हैं। सोमवार को अक्षांक के पिता के पास भी दूतावास से फोन आया कि आपका बेटा खारकीव शहर से ट्रेन से आने से इनकार कर दिया है। उसे समझाएं, वहां से निकलना होगा। मंगलवार को खारकीव से एक ट्रेन विद्यार्थियों को लेकर बॉर्डर की तरफ रवाना किया जाएगा। इधर अक्षांक शर्मा ने पिता से हुई फोन पर बातचीत में कहा कि उसके साथ करीब 60 विद्यार्थी बंकर में हैं। खारकीव में ही सबसे अधिक खतरा हैं। ऐसी स्थिति में यहां से ट्रेन से निकलना सुरक्षित नहीं हैं। लिहाजा वह भी सभी विद्यार्थियों के साथ ही निकलेगा। उसने बताया कि सोमवार को खारकीव में कुछ देर के लिए दुकानें खुली, जहां उन्होंने साथियों के साथ खाने-पीने का कुछ सामान खरीदा हैं। पैसे खत्म हो गए हैं।
रोमानिया की राजधानी के लिए निकला संचित
ग्रेटर नोएडा के अंसल गोल्फ लिंक-1 निवासी संचित शर्मा सोमवार को रोमानिया की राजधानी के लिए निकल चुका है। बीते दो दिन से संचित ने रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचने और एंट्री करने की काफी जद्दोजहद की। आखिरकार संचित को बॉर्डर से एंट्री मिल गई है। अब वह राजधानी की ओर रवाना हो चुका है। परिजनों का कहना है कि बॉर्डर में एंट्री के बाद भोजन, पानी और शेल्टर सब कुछ मिला। उसे राजधानी तक जाने के लिए निशुल्क वाहन मिला।