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वैज्ञानिकों ने परखी ट्विन टावर के अंतिम ब्लास्ट की रूपरेखा

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नोएडा। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (सीआईएमएफआर) के वैज्ञानिक मंगलवार को सेक्टर-93ए सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट ट्विन टावर परिसर पहुंचे। यहां उन्होंने साइट का जायजा लिया और अंतिम ब्लास्ट की रूपरेखा को परखा। वैज्ञानिकों ने एजेंसी एडिफिस इंजीनियरिंग के सदस्यों से इस संबंध में सवाल पूछे। इस मौके पर सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) के अंतरिम निदेशक डीपी कानूनगो समेत चार अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अब एडिफिस इंजीनियरिंग ने सीआईएमएफआर से लिखित में सवाल पूछने को कहा है, ताकि वह जवाब दे सकें।
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एडिफिस इंजीनियरिंग की ओर से ब्लास्ट डिजाइन में छोटा सा बदलाव करते हुए बेसमेंट और 13वें फ्लोर पर भी ब्लास्ट करने की योजना बनाई है। अब 32 में से 18 फ्लोर पर विस्फोटक लगेंगे। ऐसे में सीबीआरआई की ओर से ट़्िवन टावर परिसर के अलावा ब्लास्ट डिजाइन को परखने की बात कही गई थी। इसके बाद टीम की ओर से तीन दिवसीय दौरे का कार्यक्रम बनाया गया। मंगलवार को सीबीआरआई के अंतरिम निदेशक समेत चार लोगों के अलावा सीआईएमएफआर के दो वैज्ञानिक साइट स्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने पूछा कि कितना विस्फोटक लगेगा। कैसे ब्लास्ट करेंगे। योजना में कोई बदलाव किया है या नहीं। इस बाबत एडिफिस इंजीनियरिंग की ओर से बताया गया कि प्रोजेक्ट करीब-करीब खत्म होने के कगार पर है। 95 से 98 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। साइट के चाराें ओर कंटेनर लग रहे हैं। साइट की साफ-सफाई की जा रही है। गेल के पाइपलाइन को ढकने का काम किया जा रहा है। बेसमेंट में जिओ फाइबर टेक्सटाइल लगाने का काम किया जा रहा है।
अब 3500 किलोग्राम लगेंगे विस्फोटक
अब 3500 किलोग्राम विस्फोटक लगेंगे। दरअसल, दो अन्य फ्लोर पर भी विस्फोटक लगाने की योजना बनाई गई है। इस वजह से विस्फोटक बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। इससे पहले केवल 16 तलों पर ही विस्फोटक लगाने की योजना बनाई गई थी। इसके बाद अब योजना में छोटा सा बदलाव किया गया है।
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सीईओ समेत आरडब्ल्यूए से मिलेंगे वैज्ञानिक
सीआईएमएफआर के वैज्ञानिक तीन दिनों के लिए नोएडा पहुंचे हैं। आज वह नोएडा प्राधिकरण की सीईओ से मिलेंगे। इसके अलावा एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए से भी मिलने की उनकी योजना है। सीईओ से मिलने के बाद वह साइट विजिट के दौरान की रिपोर्ट आदि बताएंगे। इस दौरान सीबीआरआई के लोग भी रहेंगे।
ई-मेल से पूछेंगे ब्लास्ट डिजाइन को लेकर सवाल
सीआईएमएफआर के वैज्ञानिक ई-मेल से ब्लास्ट डिजाइन के लिए सवाल पूछेंगे। एडिफिस इंजीनियरिंग की टीम ई-मेल से ही जवाब भी देगी। अगर सीआईएमएफआर की ओर से कोई सुझाव दिया जाता है तो इसका फैसला उच्चाधिकारियों की ओर से लिया जाएगा। सूत्रों की मानें तो निरीक्षण करने वाले वैज्ञानिक माइनिंग के एक्सपर्ट है। यानी अनकंट्रोल्ड ब्लास्ट का अनुभव है, जबकि यहां इमारत में विस्फोट कराना है। यहां कंट्रोल्ड ब्लास्ट के अनुभव वाले विशेषज्ञों की जरूरत है।
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