पार्सल में 100 ग्राम ड्रग्स, चार किलो कपड़े, चार पासपोर्ट और तीन क्रेडिट कार्ड होने की जानकारी दी गई। इसके बाद कॉल मुंबई क्राइम ब्रांच के कथित पुलिस अधिकारी के पास ट्रांसफर कर दी। उसने पीड़ित के मोबाइल पर मुंबई पुलिस का आईकार्ड भेजकर खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी नरेश गुप्ता बनर्जी बताया। उसने प्रमोद से कहा कि उसके केवाईसी की डिटेल विभिन्न शहरों के अलग-अलग बैंकों में खोले गए खाते में इस्तेमाल की गई है।
इन खातों का सीधा लिंक मनी लॉन्ड्रिंग केस से है। यह भी बताया गया कि पीड़ित के बैंक संबंधी डिटेल का प्रयोग जिन आतंकवादी गतिविधियों में किया गया है उसका संबंध दाउद इब्राहिम और नवाज मलिक के गिरोह से है। बताया गया कि नवाज मलिक 18 माह से जेल में है। जालसाज ने कहा कि अगर उसने इस मामले में सहयोग नहीं किया तो वह बड़ी परेशानी में पड़ सकते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल पर आने के लिए विवश कर दिया गया। वीडियो कॉल में शिकायतकर्ता की फोटो तो साफ दिख रही थी पर दूसरी तरफ से सिर्फ मुंबई पुलिस के क्राइम ब्रांच का लोगो दिख रहा था। इसके बाद जालसाज ने 24 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट कर और 52.50 लाख रुपये ठग लिए।
डिजिटल अरेस्ट में सोने भी नहीं दिया
डिजिटल अरेस्ट के दौरान जालसाजों ने रिटायर्ड जीएम को सोने भी नहीं दिया गया। साथ ही सगे-संबंधियों से भी इन बातों का जिक्र नहीं करने के लिए कहा गया। जालसाजों ने सीबीआई के नाम का एक लेटर भेजा। इसमें लिखा गया है इस मामले में अब आपको जेल जाने से कोई रोक नहीं पाएगा। फिर आतंकी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग केस से बाहर निकालने में मदद करने की बात कहकर बैंक अकाउंट और एफडी समेत अन्य जानकारी ले ली। इसके बाद पहली बार में 22.50 लाख, दूसरी बार में 26.50 लाख और तीसरी बार में 3.50 लाख रुपये की रकम ट्रांसफर कराई। जब और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाने लगा तब पीड़ित को ठगी की आशंका हुई।
क्या है डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट में मोबाइल या लैपटॉप से स्काइप या किसी अन्य एप से वीडियो कॉल कर पीड़ित पर नजर रखी जाती है। उसे डरा धमका कर वीडियो कॉलिंग से दूर नहीं होने दिया जाता है। इसमें एक तरह से आरोपी को उसके घर में कैद कर दिया जाता है। इस दौरान न तो वह किसी से बात कर सकता है और न कहीं जा सकता है। उसे इतना डरा दिया जाता है कि उससे लाखों रुपये का ट्रांजेक्शन के लिए मजबूर होना पड़ता है।
नोएडा में डिजिटल अरेस्ट की वारदात
फरवरी: सेक्टर-34 निवासी युवती को डिजिटल अरेस्ट कर 11 लाख की वसूली
मार्च : महिला इंजीनियर को आठ घंटे तक डिजिटल अरेस्ट कर 3.75 लाख की ठगी
अप्रैल: बहुराष्ट्रीय कंपनी के अधिकारी से मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर 22 लाख की ठगी
10 मई : महिला डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर 45 लाख ऐंठे।
14 मई : सेवानिवृत मेजर जनरल को डिजिटल अरेस्ट कर 37 लाख की ठगी।