Ration of the poor was sold from the government office, CM Flying's team raided and recovered 800 bags of wheat
फिरोजपुर झिरका। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते द्वारा लगातार छापामारी के बावजूद जिले में सरकारी राशन की कालाबाजारी रुक नहीं रही है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के जिला संयोजक अंशुल सैनी की शिकायत पर खंड के गांव मोहम्मदबास में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने छापामारी कर रजाक के घर से गेहूं के लगभग 642 कट्टे बरामद किए हैं। पुलिस और सीएम उड़नदस्ते की टीम को देखकर मकान मालिक रजाक, गाड़ी चालक और अन्य फरार हो गए। इस संबंध में पुलिस ने खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक की शिकायत पर चार लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
अंशुल सैनी ने बताया कि कोरोना महामारी के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना चलाई जा रही है। इसके तहत प्रत्येक परिवार के सदस्य को 5 किलोग्राम गेहूं केंद्र सरकार की तरफ से और 5 किलोग्राम गेहूं प्रदेश सरकार द्वारा दो रुपये प्रतिकिलो की दर से मिलता है। लेकिन, कुछ लोगों द्वारा सरकारी राशन की खरीद-फरोख्त की जा रही है। इस संबंध में उनके पास भी शिकायतें आई थीं। इस बाबत उन्होंने सीएम उड़नदस्ते के उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी। शनिवार सुबह सूचना मिली कि एक कंटेनर नूंह के वेयर हाउस से सरकारी गेहूं के कट्टों को लाया है और मोहम्मद बास गांव में कट्टों को उतार रहा है। थाना प्रबंधक अरविंद कुमार और सीएम फ्लाइंग टीम के सत्येंद्र सिंह ने टीम के साथ मौके पर दबिश दी। पुलिस और सीएम फ्लाइंग के कर्मचारियों को देखकर मकान मालिक और गाड़ी का चालक तथा अन्य फरार हो गए। खाद्य आपूर्ति विभाग की तरफ से शिकायत देकर मकान मालिक रजाक निवासी मोहम्मद बास सहित स्टोर कीपर, राशन की सप्लाई करने, गाड़ी चालक सहित अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्जकर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
वर्जन
इस संबंध में पुलिस ने मकान मालिक रजाक निवासी मोहम्मद बास, गाड़ी चालक, स्टोर कीपर, सप्लायर सहित अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। अरविंद कुमार, थाना प्रबंधक फिरोजपुर झिरका
जांच हुई तो नपेंगे विभाग के कई अधिकारी
जानकारों की मानें तो लंबे समय से सरकारी राशन की खरीद-फरोख्त कर व्यापारियों और आढ़तियों को गेहूं बेचा जा रहा था। इस संबंध में सारी जानकारी विभाग के अधिकारियों को थी, लेकिन मिलीभगत के कारण कोई कार्रवाई नहीं कर रहा था। अगर इस मामले की गहनता से जांच होती है तो विभाग के कई अधिकारी भी नप सकते हैं।