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Noida News: रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम फेल, लाखों रुपये बर्बाद

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रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम फेल, लाखों रुपये बर्बाद
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सफाई व देखरेख न होने के कारण वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टमों में गंदगी जमा
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। सरकारी दफ्तर व सार्वजनिक स्थानों पर बनाए गए अधिकांश रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम केवल खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। सफाई व देखरेख न होने के कारण रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टमों में गंदगी जमा है। बारिश का लाखों लीटर पानी जमीन में जाने के बजाए नालों में बह जाता है।
गौतमबुद्ध नगर के जिला मुख्यालय के भवन की छत के पानी के लिए परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है। करीब तीन साल पहले निर्माण कराया गया था। भवन के सभी छतों के पाइप लाइन को चारों ओर बनाकर मैनहोल बनाए गए। उनको पाइपों के जरिए हार्वेस्टिंग सिस्टम में पहुंचाया गया। तीन स्थान पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए गए, लेकिन देखरेख नहीं होने के कारण कई स्थानों पर मैनहोल टूट चुके हैं तो किसी में ईंट पत्थर भरे हैं। सफाई नहीं होने के कारण पानी जमीन में जाने के बजाए टूटे मैनहोल से निकलकर परिसर में जमा हो जाता है। वहीं विकास भवन के मेन गेट के बराबर में सालों पहले वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया था। विकास भवन के छत के पानी को पाइप लाइन के जरिए लाकर सिस्टम में डाला गया था। वाटर हार्वेस्टिंग की कई साल से सफाई नहीं की गई।
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करीब एक लाख रुपये आता है खर्च

रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली की स्थापना में करीब एक लाख रुपये का खर्च आता है। इस प्रणाली में भवन का पूरा पानी एक स्थान पर लाकर पाइप के जरिए नीचे उतारा जाता है। नीचे भवन के क्षेत्रफल के हिसाब से टैंक बनाया जाता है। उसमें बोरिंग कराई जाती है। बारिश का पानी टैंक व बोर के जरिए जमीन के अंदर जा सके, इससे जलस्तर में सुधार होता है।
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वर्जन

जिस विभाग के परिसर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बना है, उस विभाग की रखरखाव और चालू रखने की जिम्मेदारी है। विकास भवन के गेट पर बने सिस्टम की जल्द ही सफाई कराई जाएगी, जिससे उसका उपयोग हो सके। -जनार्दन सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
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