परसौल के पीएसी जवान की मथुरा में संदिग्ध हालत में मौत
-गले में गोली लगने से हुई है मौत, गांव में सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
-मथुरा पुलिस बता रही आत्महत्या, परिजन संतुष्ट नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
दनकौर। परसौल गांव निवासी पीएसी के जवान सुधीर कुमार की मथुरा के पीएसी कैंप में मंगलवार तड़के संदिग्ध हालत में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि गले में गोली लगने से उनकी मौत हुई है। जवान का शव पोस्टमार्टम के बाद दोपहर गांव पहुंचा। गमगीन माहौल में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। वहीं मथुरा पुलिस प्राथमिक जांच में आत्महत्या बता रही है। अन्य बिंदुओं पर भी गहनता से जांच करने की बात पुलिस कह रही है। जवान के परिजनों का कहना है कि उनके बेटे के जीवन में कोई आर्थिक या मानसिक तनाव नहीं था। ऐसे में आत्महत्या करने का सवाल ही नहीं उठता है।
मृतक के पारवारिक चाचा नीरज मालिक के मुताबिक करीब 3 साल पहले सुधीर पुलिस बल में भर्ती हुए थे। परिवार में उनकी मां बिमलेश व बड़ा भाई पवन समेत अन्य लोग हैं। उसकी आगरा में पीएसी की 15वीं वाहिनी में तैनाती थी। वाहिनी के जवानों की मथुरा में ईदगाह के पास लगने वाले मेले की सुरक्षा व्यवस्था में ड्यूटी लगी थी। सोमवार शाम सुधीर ने अपने भाई मां व 3 साल की भतीजी से फोन पर बात भी की थी। उन्होने बताया था कि स्वास्थ्य जांच के लिए उनको 3 दिन की छुट्टी मिल गई है। मंगलवार की ड्यूटी दोपहर 2 बजे तक पूरी करने के बाद शाम तक घर आ जाएंगे। लेकिन मंगलवार को सूचना मिली कि पीएसी कैंप में उनकी मौत हो गई। सूचना पर परिजन शव लेने मथुरा पहुंचे।
वहीं मथुरा पुलिस ने परिजनों को बताया है कि वह मंगलवार तड़के अन्य जवानों के साथ कैंप से ड्यूटी पर जाने के लिए तैयार होकर गाड़ी में बैठ गए थे। लेकिन अचानक कोई सामान लेने गाड़ी से उतरकर वापस कैंप में चले गए। कुछ देर बाद ही गाड़ी में बैठे अन्य साथियों को कैंप से गोली चलने की आवाज आई। मौके पर जाकर देखा तो सुधीर घायल अवस्था में पड़े थे। जवानों ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।परिजनों का कहना है कि वह लेकिन पुलिस के बयान से वह संतुष्ट नहीं है। उनके बेटे के साथ कोई घटना या दुर्घटना हुई है। वह आत्महत्या नहीं कर सकता।
जन्मदिन पर घर पहुंचा शव
मंगलवार को कांस्टेबल सुधीर कुमार का जन्मदिन था। परिजनों से बात करते वक्त उन्होने जन्मदिन पर घर आकर जन्मदिन मनाने की बात कही थी। उन्हें क्या पता था कि जन्मदिन पर उनका तिरंगे में लिपटा हुआ शव घर पहुंचेगा। गांव समेत पूरे क्षेत्र में उनकी मौत से गम का माहौल है। परिजन आने वाली सर्दियों में उनकी शादी करने के लिए रिश्ते की तलाश में जुटे हुए थे।