नूंह। हरियाणा सेवा अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने मंगलवार को नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक अधिकारियों, संबंधित विभागों के अध्यक्षों तथा समाजसेवियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि जल्द ही अधिनियम के दायरे में आने वाली अन्य सेवाओं को भी सेवा का अधिकार अधिनियम (आरटीएस) के दायरे में लाया जाएगा। लंबित आवेदनों की संख्या अधिक होने के कारण महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, बिजली, वेलफेयर ऑफ एससी-बीसी, श्रम विभाग के अधिकारियों को फटकार भी लगाई। उन्होंने जल्द से जल्द सुधार के निर्देश दिए, वहीं अच्छा कार्य करने पर बागवानी विभाग की सराहाना भी की।
उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रॉपर्टी आईडी, परिवार पहचान पत्र में संशोधन, सीवरेज कनेक्शन, खाद और फसल विविधीकरण प्रोत्साहन योजनाओं, मनरेगा, स्वामित्व योजना के तहत किए गए पंजीकरण में शुद्धीकरण, मार्कशीट, डिग्री व स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण जैसी विभिन्न योजनाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल किया जाएगा। उन्होंने विभागाध्यक्षों को सख्त हिदायत दी और लक्ष्य भी निर्धारित किए। उन्होंने निर्देश दिए कि सेवाओं के निपटान के मामले में विभागों का स्कोर 10 में से कम से कम 9.9 होना चाहिए। इसके अतिरिक्त नागरिकों से सेवाओं के संबंध में ली जाने वाली प्रतिक्रिया के मामले में 5 में से कम से कम 4 अंक होने चाहिए।
ऑटो अपील सिस्टम किया विकसित :
मुख्य आयुक्त ने बताया कि लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में ऑटो अपील सिस्टम (आस) विकसित किया गया है, जिसमें सेवाओं में की जाने वाली देरी के मामलों में स्वयं ही अपील फाइल होगी। इसके अतिरिक्त जल्द ही एक कॉल सेंटर की स्थापना भी की जाएगी, जिसमें देरी के मामलों में आवेदक फोन करके अपनी शिकायत दर्ज करवा सकेंगे। उन्होंने कहा कि नागरिक आरटीएससी-एचआरवाई डॉट जीओवी डॉट आईएन पर भी अपनी शिकायत आयोग से कर सकते हैं। इसके अलावा सरल पोर्टल पर दी जाने वाली सेवाओं के लिए हेल्पलाइन नंबर 0172-3968400 पर फोन कर शिकायत की जा सकती है। इस अवसर पर फरीदाबाद मंडल के आयुक्त संजय जून व उपायुक्त शक्ति सिंह ने बताया कि नागरिकों के लिए सेवा का अधिकार अधिनियम एक मजबूत माध्यम है, जिसके द्वारा उन्हें समयबद्ध सेवाएं मिलती हैं। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी विभागाध्यक्ष को हिदायत दी कि वे अपनी कार्य प्रणाली में सुधार करें। नूंह जिला अभी भी 15वें स्थान पर है, जिसका आरटीएस स्कोर 9.2 है। इस दौरान सेवा का अधिकार आयोग की सचिव मीनाक्षी राज ने कहा कि बैठक में उपस्थित अधिकारी आत्ममंथन करके जाएं। यदि वे अपना कार्य ईमानदारी और बेहतर ढंग से करेंगे तो इससे लोगों का जीवन आसान बनेगा। इस मौके पर उपायुक्त कैप्टन शक्ति सिंह ने मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता को ‘हेरीटेज ऑफ मेवात’ पुस्तक भी भेंट की। इस अवसर पर नूंह एसडीएम सलोनी शर्मा, पुन्हाना एसडीएम मनीषा शर्मा, एसडीएम फिरोजपुर-झिरका रणवीर सिंह, जिला परिषद के सीईओ गजेंद्र सिंह, नगराधीश जयप्रकाश, मेडिकल निदेशक पवन गोयल, अतिरिक्त निदेशक सतेंद्र दूहन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
तीन बार जुर्माना लगने पर होगी बर्खास्त की सिफारिश
मुख्य आयुक्त ने कहा कि 31 अक्तूबर तक सभी विभाग वर्ष 2020 तक की लंबित सेवाओं के मामलों का निपटान करना सुनिश्चित करें। हिदायत दी कि विभाग नागरिकों को प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं के मामले में रिजेक्शन रेट को भी कम से कम करे। यदि इन बिंदुओं पर किसी भी अधिकारी की लापरवाही पाई गई तो उन्हें समन जारी कर मुख्यालय बुलाया जाएगा। ऐसे मामलों में 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि किसी एक अधिकारी पर 3 बार जुर्माना लगता है तो उसे नौकरी से बर्खास्त करने की सिफारिश भी सरकार से की जाएगी। अभी तक लापरवाही के मामलों में आयोग ने 250 अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।
31 विभागों की 546 सेवाएं आरटीएस में सूचीबद्ध
मुख्य आयुक्त ने कहा कि फिलहाल 31 विभागों की 546 सेवाओं को आरटीएस में सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें से 277 सेवाएं अंत्योदय सरल, 184 ऑनलाइन पोर्टल तथा 85 ऑफलाइन सेवाएं हैं। ऑफलाइन सेवाओं को भी जल्द ही ऑनलाइन कर सेवा का अधिकार अधिनियम के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार व राज्य सेवा अधिकार आयोग का उद्देश्य आम जनमानस तक सरकारी सेवाओं तथा योजनाओं का पूर्ण लाभ समयबद्ध अवधि में पहुंचाना है।