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अब ऑनलाइन करा सकेंगे ट्रांसफर मेमोरेंडम का सत्यापन

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ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण ने ट्रांसफर मेमोरेंडम (टीएम) का सत्यापन ऑनलाइन करने की घोषणा कर दी है। सिटीजन चार्टर के तहत प्राधिकरण कर्मी को एक सप्ताह में सत्यापन करना होगा। यदि इससे ज्यादा समय लगता है तो संबंधित कर्मी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। सही जवाब नहीं देने पर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। टीएम का सत्यापन 17 मई से शुरू हो जाएगा। अब यह आफलाइन आवेदन नहीं हो पाएगा और इसका हर रोज 500 लोगों को लाभ मिलेगा।
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यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि अब आवंटी या खरीददार देश-विदेश में से भी ऑनलाइन सत्यापन करा सकेंगे। इसके लिए उन्हें प्राधिकरण कार्यालय आने की जरूरत नहीं होगी। इससे दूर-दराज से आने वालों लोगों न सिर्फ खर्च बचेगा बल्कि प्राधिकरण में सत्यापन के नाम पर जारी भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। सीईओ ने कहा कि यीडा सिटीजन चार्टर को लागू कर चुका है। इसके तहत 15 ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उसी के तहत ट्रांसफर मेमोरेंडम प्रक्रिया को फिजिकल के बजाए ऑनलाइन करते ह्ए पेपरलेस कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ आवंटी विदेश या किसी दूसरे शहर में रहते हैं। उन्हें केवल सत्यापन के लिए यहां पर आना होता था। चंद मिनट के काम के लिए कई दिन लग जाते थे। इसके अलावा अधिकारी व कर्मचारी भी उनका उत्पीड़न करते थे। इसकी जानकारी जब मिली तो सिटीजन चार्टर के तहत इस व्यवस्था को लागू करने की योजना बनाई। अब यीडा की वेबसाइट पर जाकर आवंटी और खरीददार दोनों अपना सत्यापन करा सकेंगे। उनके द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर करके प्रक्रिया को घर बैठे ही बढ़ाया जा सकेगा। इसके लिए आधार नंबर डालना होगा और संबंधित नंबर पर ओटीपी आएगा। इसके अलावा दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे। आवेदन होने के एक सप्ताह के बाद प्राधिकरण में सत्यापन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सत्यापन के लिए दो लाख रुपये तक वसूले जा रहे थे आवंटियों से
यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों की मानें तो रोजाना 500 आवंटियों द्वारा टीएम सत्यापन के लिए आवेदन किया जाता है। आवंटी विदेश में हो या देश किसी दूसरे कोने में तो उनको सत्यापन के लिए बुलाया जाता था। उनके द्वारा मजबूरी बताए जाने पर मोबाइल आदि से भी वीडियो कॉल करके सत्यापन कर दिया जाता था, लेकिन उसके एवज में 50 हजार से दो लाख रुपये तक वसूले जाते थे।
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चालान का सत्यापन भी होगा आसान
प्राधिकरण ने सोमवार को बैंक अधिकारियों के साथ बैठक की और कहा कि चालान सत्यापन को एक सप्ताह से अधिक समय लगाया जाता है। जब आवंटी ने पैसा जमा किया है तो उसी चालान पर कोई होलोग्राम या बारकोड लगा दें। इससे उसके सत्यापन की जरूरत ही न पड़े। इसे भी अगले सप्ताह से शुरू करा दिया जाएगा। इसके लिए आवंटी को अपना प्राधिकरण की वेबसाइट पर खाता बनाना होगा।
सिटीजन चार्टर का लाभ
- कोई भी आवंटी अपना पानी का बिल ऑनलाइन हासिल कर सकेगा
- आवंटियों को मिलेगी भूखंड के बारे में जानकारी
- प्लॉट के मोरगेज की प्रक्रिया भी होगी ऑनलाइन
- संपत्ति के ट्रांसफर में मिलेगी सुविधा
- किसी व्यक्ति को ब्लड रिलेशन में गिफ्ट डीड कराना होगा आसान
- व्यावसायिक और इंडस्ट्री की समस्याओं का होगा समाधान
- किसान का प्लॉट लगा है या नहीं, लगा है तो कहां पर
- किसान की कितनी राशि भूखंड विकास के लिए देनी होगी
क्या है ट्रांसफर मेमोरेंडम
ग्रेटर नोएडा। ट्रांसफर मेमोरेंडम(टीएम) का अर्थ हस्तांतरण होता है। जब भी कोई व्यक्ति प्राधिकरण का भूखंड बेचता है तो वह अधिकारियों के समक्ष जाकर एक आवेदन देता है। इसमें लिखा जाता है कि उसने अपना भूखंड दूसरे व्यक्ति को बेच दिया है। अब प्लॉट खरीदने वाले के पक्ष में टीएम जारी कर दिया जाए। प्राधिकरण अधिकारी भूखंड बेचने वाले का आधार व अन्य दस्तावेज के आधार पर अपने अभिलेखों के अनुसार सत्यापन करते हैं। इसके बाद ही प्लॉट खरीदने वाले के पक्ष में हस्तांतरण किया जाता है। ट्रांसफर मेमोरेंडम जारी होने के बाद पहले या मूल आवंटी का अधिकार समाप्त हो जाता है और खरीदने वाले व्यक्ति के नाम यह प्लॉट ट्रांसफर कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद 90 दिन के अंदर खरीददार को रजिस्ट्री करानी होती है। अधिवक्ता नरेश कुमार बताते हैं कि जिस तरह जमीन बेचने के बाद खतौनी से नाम हटाकर दाखिल खारिज होता है। उसी तरह प्राधिकरण में प्लॉट बेचने की प्रक्रिया में टीएम है। यह भी एक तरह से नाम बदलने की ही प्रक्रिया है, लेकिन प्राधिकरण में इसे रजिस्ट्री कराने से पहले कराया जाता है और जमीन की खरीद-फरोख्त में यह प्रक्रिया रजिस्ट्री के बाद होती है। ब्यूरो
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