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अब अपनी आवंटित जमीन खुद से नहीं बेच सकेंगे बिल्डर

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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में बोर्ड बैठक करते प्राधिकरण के अधिकारी। - फोटो : Grnoida
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ग्रेटर नोएडा। फ्लैट खरीदारों के हितों को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने बड़े प्लॉटों के सब-डिवीजन पर रोक लगा दी है। अब बिल्डर प्राधिकरण से जमीन आवंटित कराने के बाद खुद से बेच (सब-डिवीजन) नहीं सकेंगे। उनको प्रोजेक्ट पूरा करना होगा। सोमवार को आयोजित 124वीं बोर्ड बैठक में इसकी मंजूरी दी गई।
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अधिकारियों के मुताबिक इससे दो फायदे होंगे। बिल्डर उतनी ही जमीन लेंगे, जितने पर उनको प्रोजेक्ट बनाना है। दूसरे, खरीदारों के फ्लैट तय समय पर मिल सकेंगे। सब डिवीजन के चलते समय बर्बाद नहीं होगा। उनको तय समय पर फ्लैट बनाकर देने की जिम्मेदारी आवंटी बिल्डर पर होगी। दरअसल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बड़े बिल्डरों ने प्लॉट आवंटन के बाद उसे दूसरे बिल्डरों को बेच दिया। इससे खरीदारों को समय पर फ्लैट नहीं मिलेे। वहीं प्राधिकरण का बकाया भी बिल्डरों ने नहीं चुकाया। उन्होंने प्राधिकरण से 10 प्रतिशत राशि जमा कराने के बाद प्लॉट का आवंटन करा लिया। फिर वहां अपने बोर्ड लगाकर लोगों से पैसे ले लिए। लेकिन फ्लैट बनाकर नहीं दिए।
नोएडा के स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट में बिल्डर ने कई दूसरे बिल्डरों को प्लॉट काटकर बेच दिया। ऐसे में जिन्होंने वहां पैसे लगाए। वह यहां ठगा महसूस कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल ग्रेटर नोएडा का भी है। यही वजह है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इस तरह की किसी भी गतिविधि को लगाम लगाने के लिए बड़े प्लॉट को काटने की अनुमति देने से मना कर दिया है। स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में नोएडा ने इसकी अनुमति देने से मना किया है।
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स्मार्ट विलेज परियोजना पर बोर्ड की भी हरी झंडी
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में 14 गांवों को स्मार्ट विलेज बनाने की योजना की समीक्षा की गई। सीईओ नरेंद्र भूषण ने बोर्ड को बताया कि 14 गांवों में से मायचा में काम शुरू हो चुका है। बाकी बचे 13 गांवों की टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। स्मार्ट विलेज परियोजना के पहले चरण के अंतर्गत सीवर, ड्रेनेज, पानी, नाली, खड़ंजा, सीसी रोड, विद्युतीकरण आदि विकसित किए जाएंगे। वहीं, दूसरे चरण में लाइब्रेरी, वाई-फाई की सुविधा, युवाओं के लिए ट्रेनिंग सेंटर, स्मार्ट क्लास बोर्ड आदि की सुविधा दी जाएगी। ट्रेनिंग सेंटर में युवाओं को रोजगार परक कोर्स की जानकारी दी जाएगी, जिससे उनको कैरियर बनाने में मदद मिल सके।
आवासीय योजना के निर्मित भवनों की कीमत बोर्ड से मंजूर
प्राधिकरण बोर्ड ने सेक्टर ज्यू वन, टू व थ्री की दरें आवासीय योजना के भवनों की तय दरों पर मुहर लगा दी है। 120 वर्ग मीटर वाले भूखंडों की कीमत 58.99 लाख और 200 वर्ग मीटर के भूखंडों की कीमत 82.91 लाख रुपये होगी। प्राधिकरण ने 113 भवनों की यह योजना लांच कर दी है। आवेदक 10 नवंबर से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
जल्द आएगी फ्यूल स्टेशनों की स्कीम
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बहुत जल्द फ्यूल स्टेशनों की योजना लाने जा रहा है। पब्लिक की सुविधाओं को देखते हुए इन फ्यूल स्टेशनों की जगह तय की जाएगी, ताकि फ्यूल भरवाने के लिए वाहनों को इधर-उधर भटकना न पड़े। प्राधिकरण बोर्ड ने यह योजना लाने के लिए स्वीकृति दे दी है।
अब एफएआर खरीद सकेंगी पुरानी कंपनियां
वर्ष 1991 में ग्रेटर नोएडा बसने से पहले बनी लगभग 50 से अधिक औद्योगिक इकाइयां (स्पॉट जोन की कंपनियां) अब प्राधिकरण से बचे हुए प्लॉट पर एफएआर (फ्लोर एरिया रेश्यो) खरीद कर अपना दायरा बढ़ा सकेंगी। इसके लिए तय शुल्क का भुगतान करना होगा। सोमवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 124वीं बोर्ड ने इस पर सैद्धांतिक सहमति दी गई। औद्योगिक विकास आयुक्त उत्तर प्रदेश व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन संजीव मित्तल की अध्यक्षता में संपन्न बोर्ड बैठक में ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण, नोएडा प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी, यीडा के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह, ग्रेनो प्राधिकरण के एसीईओ दीपचंद्र, एसीईओ अमनदीप डुली समेत अन्य शामिल हुए। वहीं, प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास अरविंद कुमार बैठक में ऑनलाइन शामिल हुए।
ग्रेटर नोएडा में 50 से अधिक ऐसी औद्योगिक कंपनियां हैं, जो प्राधिकरण के अस्तित्व में आने से पहले ही इकाई लगाकर उत्पादन कर रही हैं। इनमें से बहुत सी कंपनियां ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान कर रहीं थीं। प्राधिकरण की ओर से इन औद्योगिक इकाइयों द्वारा किए गए निर्माण को रेगुलराइजेशन (स्पॉट जोन) किया जा चुका है। प्राधिकरण की टीमें इन्हें चिह्नित कर रही हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड के इस फैसले से ऐसी इकाइयां अपना विस्तार कर सकेंगी। इससे निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ग्रेटर नोएडा में स्थापित यह इकाइयां प्राधिकरण की के बनाए गए संसाधनों का उपयोग कर रही हैं। इन कंपनियों को विकास शुल्क भी देना होगा। इसके बाद ये कंपनियां प्राधिकरण से आवंटित अन्य औद्योगिक भूखंडों की तरह सभी स्वीकृति प्राप्त कर सकेंगी। कंपलीशन व फंक्शनल सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकेंगी। साथ ही नियमानुसार तय शुल्क का भुगतान कर अतिरिक्त एफएआर खरीद सकेंगी। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने इस पर स्वीकृति दे दी है।
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