गौतमबुद्ध नगर में आने वाले समय में जिले में ही डेल्टा प्लस जैसे खतरनाक कोविड-19 वैरिएंट के बारे में जानकारी मिल सकेगी। सब कुछ ठीक रहा तो तीन माह में राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में जीनोम सीक्वेंसिंग लैब बनेगी।
लंबे इंतजार के बाद शासन ने जीनोम लैब के फंड देने के लिए मंजूरी दे दी है। जिम्स में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विवेक गुप्ता ने बताया कि जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन के लिए दो करोड़ रुपये की राशि की व्यवस्था है। लैब में इसके साथ आने वाले उपकरणों के लिए भी राशि की जरूरत पड़ेगी। इसकी जल्द ही शासन से मांग की जाएगी।
जिम्स में जीनोम पर रिसर्च करने के लिए वैज्ञानिकों की अच्छी टीम मौजूद है। ऐसे में वर्ष 2020 में कोविड की लहर आने के बाद ही यहां पर जीनोम रिसर्च लैब की आवश्यकता जताई जा रही थी। जिससे अल्फा, डेल्टा, डेल्टा प्लस जैसे वैरिएंट का पता लगाकर उसकी रोकथाम की योजना बनाई जा सके। लैब के लिए कई बार अमर उजाला की ओर से मुद्दा उठाने के बाद शासन ने इस पर संज्ञान लिया है।