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Nithari Case: कदम-कदम पर लापरवाही... CBI ने शुरुआत जांच में ही कर दी बड़ी चूक; ब्लड सैंपल तक ठीक से नहीं लिए

Wed, 18 Oct 2023 11:21 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

Nithari Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी नरसंहार में सीबीआई कोर्ट से फांसी की सजा पाए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने कहा, पुलिस दोनों के खिलाफ आरोपी साबित करने में विफल रही। 
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Nithari Case - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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निठारी कांड के मामले में घटना के खुलासे के करीब 12 दिन बाद सीबीआई ने जांच शुरू कर दी लेकिन हर कदम पर लापरवाही बरती गई। सीबीआई डी-5 कोठी के अंदर किसी हत्या होने के सबूत से लेकर सुरेंद्र कोली के इंसानी मांस खाने जैसे आरोप का कोई सबूत कोर्ट में पेश नहीं कर सकी और न ही इस मामले की जांच मानव अंगों के तस्करी से जोड़कर की। 
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इसके बाद ही हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को राहत दे दी और सीबीआई को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। दरअसल 29 दिसंबर 2006 को निठारी कांड का खुलासा नोएडा पुलिस ने किया था। इसके कुछ दिन के बाद ही मामले की जांच सीबीआई के पास चली गई। 

कोर्ट ने फैसले में यह कहा कि इसका कोई सबूत कभी नहीं दिया गया कि कोई हत्या कोठी डी-5 के अंदर हुई है। अगर वहां कई हत्याएं होती तो घर के अंदर या किसी न किसी सामान पर खून के धब्बे जरूर होते, यानी सीबीआई ने खून के नमूने लेने में भी लापरवाही की या वहां हत्या हुई ही नहीं।
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इसी तरह कोली पर आरोप था कि वह इंसानी मांस खाता था। इस पर भी सीबीआई को इंसानी मांस के अवशेष पाए जाने के न सैंपल मिले नहीं कोई सबूत। साथ ही जांच एजेंसियों की तरफ से जिस सफाई करने वाले कपड़े से गला घोंटकर हत्या करने का दावा किया गया था, वह कपड़ा भी कोठी नंबर डी-5 से नहीं मिला। 

सीबीआई ने लापरवाही की हद तब कर दी जब महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने निठारी कांड को लेकर मानव अंगों के व्यापार होने के एंगल से जांच करने की सिफारिश की थी लेकिन एजेंसी इस तरह की जांच करने में पूरी तरह से विफल रही, हालांकि अभी इस मामले में सीबीआई के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बचा हुआ है।
 

वैज्ञानिक साक्ष्यों पर काम करने का किया था दावा
सीबीआई की टीम ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों अलावा वैज्ञानिक साक्ष्यों पर काम करने का दावा किया था लेकिन हाईकोर्ट के इस फैसले ने जांच एजेंसी के सभी दावों पर पानी फेर दिया। एजेंसी ने कोर्ट के समक्ष अंतिम सीन, ब्लड सैंपल, फॉरेंसिक, डीएनए और कपड़े से लेकर चश्मदीदों से जुड़े भी कोई सबूत नहीं दिए।

कपड़े पर होते थे खून के धब्बे
कांड को याद कर आज भी लापता ज्योति की मां सुनीता गमगीन हो जाती हैं। मंगलवार उन्होंने बताया कि वह पति के साथ कपड़े प्रेस करने का काम करती है। इस कांड से पहले जब डी-5 से कपड़े धोने और प्रेस के लिए आते थे तो उन पर खून के धब्बे होते थे। जब इस बारे में कोली से पूछती थी तो वह रंग लगे होने की बात कहता था।

निठारी बन गया था गुमशुदा तलाश केंद्र
निठारी कांड को याद करते हुए गांव के लोग कहते हैं कि जब इस घटना का खुलासा हुआ था तब गांव की बहुत बदनामी हुई थी। उस वक्त यहां रहने वाले लोग भी परेशान थे। इस सनसनीखेज घटना के खुलासे के बाद निठारी में गुमशुदा तलाश केंद्र बनाया गया था। केंद्र में उस वक्त देशभर के 1500 से अधिक लोग अपने बच्चों और परिचितों की गुमशुदगी का पता लगाने आए थे।

कोठी पर बुलडोजर चलने की अफवाह
मंगलवार को भी सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के आसपास मीडिया से लेकर अन्य लोगों का आना-जाना लगा रहा। दोपहर को कोठी के सामने एक बुलडोजर खराब हो गया। इससे लोगों के बीच चर्चा होने लगी कि कोठी पर बुलडोजर चलेगा। जब चालक ने बुलडोजर खराब होने की बात बताई, तब अफवाह पर विराम लगा। थोड़ी देर बाद चालक बुलडोजर को ठीक कराकर ले गया।

निठारी नरसंहार मामले में सुरेंद्र कोली और पंढेर बरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी नरसंहार में सीबीआई कोर्ट से फांसी की सजा पाए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने कहा, पुलिस दोनों के खिलाफ आरोपी साबित करने में विफल रही। न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने जांच पर नाखुशी जताते हुए कहा, जांच बेहद खराब थी सबूत जुटाने की मौलिक प्रक्रिया का पूरी तरह उल्लंघन किया गया। जांच एजेंसियों की नाकामी जनता के विश्वास से धोखाधड़ी है।
 

हाईकोर्ट ने कहा, जांच एजेंसियों ने अंग व्यापार के गंभीर पहलुओं की जांच किए बिना एक गरीब नौकर को खलनायक की तरह पेश कर उसे फंसाने का आसान तरीका चुना। ऐसी गंभीर चूक के कारण मिलीभगत सहित कई तरह के निष्कर्ष संभव हैं। 
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कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी अपीलकर्ताओं की निचली अदालत से स्पष्ट रूप से निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिला। सीबीआई की विशेष अदालत ने 13 फरवरी 2009 को दोनों को दुष्कर्म और हत्या का दोषी मानकर फांसी की सजा सुनाई थी। पंढेर और कोली पर 18 मासूमों और एक महिला से दुष्कर्म व हत्या का आरोप था। इस मामले अदालत में पहला केस 8 फरवरी, 2005 को दर्ज किया गया था। 


 
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