पलवल। मनरेगा कार्यों में बरती गई अनियमितता के मामले में सरकार ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने निर्देश जारी कर 50 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम मुकदमे में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इनमें बीडीपीओ, एसडीओ, जेई और अकाउंटेंट के नाम शामिल हैं। निर्देशों के तहत जिला विजिलेंस कमेटी के अध्यक्ष और एडीसी उत्तम सिंह ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय को पत्र लिख कार्रवाई की बात कही है। पहले से दर्ज मुकदमों में उक्त अधिकारियों के नाम शामिल किए जा रहे हैं। मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक ने एसआईटी की गठन किया है।
दरअसल, कोरोना काल के दौरान जिले में मनरेगा के तहत हुए विकास कार्यों में भारी अनियमितता बरती गईं। लोकपाल की जांच में अनियमितता की पुष्टि हुई और मामला मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंचा। जांच के लिए चंडीगढ़ से विजिलेंस टीम को पलवल भेजा गया। जांच में टीम को भी कार्यों में अनियमितताएं मिली। बीती 28 अप्रैल को पलवल आए उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के समक्ष मामला उठा तो उन्होंने मनरेगा घोटाले में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की बात कही। उपमुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद दो मुकदमे दर्ज किए, जिनमें किसी का नाम शामिल नहीं किया गया। उसके बाद विभिन्न थानों में दर्ज छह मुकदमों में करीब 50 बीडीपीओ, एबीपीओ और ग्राम सचिव के नाम शामिल किए गए। शुक्रवार को हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने मनरेगा जांच में पाई गई अनियमितताओं को लेकर 50 से अधिक बीडीपीओ, एसडीओ, जेई व अकाउंटेंट के नाम पहले से दर्ज मुकदमों में शामिल करने के निर्देश दिए। जिला विजिलेंस कमेटी के अध्यक्ष व एडीसी उत्तम सिंह ने बीती शनिवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय को इसके बारे में सूचित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अब मुकदमों 100 से अधिक कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सरपंच व ग्राम सचिवों ने केंद्रीय राज्य मंत्री से दोबारा जांच की मांग
मनरेगा घोटाले में केस दर्ज होने के बाद रविवार को जिला के 100 से अधिक सरपंच और ग्राम सचिव केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर मिले। जिला सरपंच एसोसिएशन के प्रधान हरदीप चौहान के नेतृत्व में मिले सरपंचों ने मामले की जांच दोबारा कराने की मांग की। सरपंचों ने मांग की कि अधिकारियों ने आपसी खींचतान में गलत तरीके से मुकदमे दर्ज कराएं हैं। अधिकारियों ने बिना जांच के कर्मचारियों के नाम मुकदमों में शामिल करा दिए हैं। खास बात यह रही कि मनरेगा में जिस खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज है, वह भी केंद्रीय राज्यमंत्री से सरपंचों के साथ मिली तथा अपने आप को निर्दोष बताया।
रविवार को भी जांच में जुटी रही विजिलेंस टीम
रविवार को भी चंडीगढ़ व रोहतक विजिलेंस के साथ जिला विजिलेंस कमेटी की टीम ने अनियमितताओं की जांच की। विश्राम गृह में सुबह से शाम तक विजिलेंस अधिकारियों की जांच जारी रही। मनरेगा कार्यों का रिकॉर्ड नहीं होने के कारण विजिलेंस टीम ने ऑनलाइन पेमेंट के आधार पर गांवों में हुए कार्यों से मिलान किया।
मुकदमों की जांच के लिए एसआईटी का गठन
जिला पुलिस अधीक्षक राजेश दुग्गल ने मनरेगा घोटाले में दर्ज मुकदमों की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। डीएसपी मुख्यालय अनिल कुमार को एसआईटी का अध्यक्ष बनाया गया। उनके नेतृत्व में इकोनोमिक सेल से इंस्पेक्टर सत्यनायारण, सब इंस्पेक्टर जवाहर सिंह को भी शामिल किया गया है। एसआईटी को इस मामले में जल्द से जल्द जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मनरेगा घोटाले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। एसआईटी जल्द ही रिकॉर्ड बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार करेगी। अगले सप्ताह इस बारे में नोटिस जारी किए जाएंगे। - यशपाल खटाना, डीएसपी