आरोप, भाजपा कानून का पालन करती है न संविधान को मानती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आप के वरिष्ठ के नेता व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि एमसीडी चुनाव में हारने के बावजूद भाजपा महापौर नहीं बनने दे रही है। इस कारण अब आम आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। दरअसल, महापौर चुनाव के दौरान भाजपा पार्षदों का हंगामा दर्शाता है कि उनकी पार्टी न तो देश के कानून का पालन करती है और न ही संविधान काे मानती है। इस कारण एमसीडी चुनाव के दो माह बाद भी भाजपा दिल्ली को महापौर नहीं मिलने दे रही है।
मेयर चुनाव स्थगित होने के बाद पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली की जनता ने आप को एमसीडी में पूर्ण बहुमत दिया फिर भी भाजपा अधिकारियों से एमसीडी चलवा रही है, क्योंकि भाजपा को पता है आप का महापौर बनने पर उसकी 17 सालों की लूट सबके सामने आ जाएगी।
उन्होंने कहा कि सभी नियम, कानून, संविधान और उपराज्यपाल की अधिसूचना के अनुसार पहले महापौर का चुनाव होता है। उसके बाद महापौर की अध्यक्षता में उपमहापौर और स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव होता है, लेकिन नियम, कानूनों व संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए पीठासीन अधिकारी ने तीनों चुनाव इकठ्ठा करने का निर्देश दिया। इसके बाद पीठासीन अधिकारी ने संविधान और डीएमसी एक्ट की अवमानना करते हुए मनोनीत पार्षदों को महापौर चुनाव में वोट डालने का अधिकार दिया। इसके बावजूद आप के पार्षद शांत रहे, क्योंकि उन्हें पता था कि भाजपा की हर बेईमानी के बाद भी आप का ही महापौर बनेगा। दरअसल दिल्ली की जनता ने सदन में आम आदमी पार्टी को पूरे बहुमत से चुनकर भेजा है, लेकिन फिर भाजपा ने हंगामा करते हुए महापौर चुनाव टालने के लिए एक बार फिर सदन को स्थगित करवा दिया।उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 243 आर के अनुसार मनोनीत पार्षद के पास नगर निगम चुनाव में वोटिंग के अधिकार नहीं होंगे। इसी तरह एमसीडी एक्ट में भी मनोनीत पार्षद को वोट देने का अधिकार नहीं है, लेकिन पीठासीन अधिकारी ने असांविधानिक तरीके से महापौर चुनाव में मनोनीत पार्षदों को वोट डालने का अधिकार दे दिया। इसके बाद उन्होंने आप के दो विधायकों पर मामले दर्ज होने पर उनको वोटिंग नहीं करने का ऐलान किया। मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह नियम दोनों पार्टियों पर लागू होना चाहिए, क्योंकि भाजपा में भ्रष्टाचारी भरे पड़े है। उसके सांसद पर तो कोरोना के समय जरूरी दवाइयों के जमाखोरी के आरोप भी लगे हुए है।