गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के वास्तुकला एवं योजना विभाग में शुक्रवार को स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग ब्लॉक बी के प्रांगण में मंडला कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। मंडला, कला के सबसे प्राचीन रूपों में से एक है, पिछले कुछ समय में इसका प्रचलन काफी बढ़ा है।
मंडला शब्द संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ है चक्र, प्रायः यह डिजाइन या पैटर्न होते हैं। मंडला का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी रहा है। मंडला एक जटिल, अमूर्त और अधिकतर परिपक्व डिजाइन है, जिसका मुख्य गुण विभिन्न प्रतीकों और ज्यामितीय पैटर्न के साथ चित्र है।
एक मंडला चित्रकारी चिकित्सीय उपयोग और प्रेरणादायक संदेश का अद्भुत समागम हो सकता है। मंडला को चित्रित करने के लिए आपको एक अनुभवी कलाकार होने की जरूरत नहीं है। जहां रचनाकार आमतौर पर एक गोलाकार रूप में जटिल डिजाइन तैयार करता है, इस डिजाइन में आमतौर पर कई परतें होती हैं और इसे रंगों से रंगा जाता है।
वर्षों से मंडला आर्ट आकार और प्रकृति के संदर्भ में विकसित हुए हैं। इसके फलस्वरूप आप आजकल विभिन्न प्रकार के मंडला देख सकते हैं। इसके बावजूद सभी मंडलों में कुछ ऐसी समानताएं होती हैं, जिसे देखकर आप कह सकते हैं कि वह एक मंडला आर्ट है।
इस विरासत को संजोकर आगे बढ़ाने के प्रयास में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविंद्र कुमार सिन्हा , रजिस्ट्रार डॉ. विश्वास त्रिपाठी, डीन डॉ. कीर्ति पाल, सांस्कृतिक कमेटी के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश और विभाग की विभागाध्यक्षा आर्किटेक्ट माधुरी अग्रवाल के संरक्षण में यह प्रतियोगिता आयोजित की गई।
कार्यक्रम में डॉ. निर्मिता मेहरोत्रा, आर्किटेक्ट अनंत प्रताप सिंह, आर्किटेक्ट अक्षिता नागर, आर्किटेक्ट राजेश कुमार, आर्किटेक्ट गौरव आदि मौजूद रहे , कार्यक्रम के आयोजन में छात्रों की ओर से प्रतीक पांडेय, ऐश्वर्य रस्तोगी, सतीश और कुशिक मिश्रा ने योगदान दिया। इस प्रतियोगिता में मनीषा को प्रथम ,अनुषिका को द्वितीय और मानसी को तृतीय पुरस्कार मिला। कार्यक्रम की समाप्ति पर सभी विजेताओं को कुलपति ने सम्मानित किया।