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अमर उजाला स्वास्थ्य अभियान : न ऑक्सीजन और न ही बेड की किल्लत, नहीं गहराएगा सांसों पर संकट

Thu, 31 Mar 2022 01:36 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, नोएडा

सार

दूसरी लहर के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में कई बड़े बदलाव दिखे। हाई फ्लो नेजल केनुला (एचएफएनसी) प्रणाली के अलावा डी-डाइमर सरीखी जांच प्रचलन में नहीं थीं। इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) जैसी सुविधा सरकारी अस्पताल में नहीं थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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कोरोना की दूसरी लहर में अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन के लिए मचे हाहाकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी से उतारकर रख दिया था, लेकिन महामारी के कारण उपजा संकट भविष्य के लिए बड़ा सबक बना। तीसरी लहर से पहले ही पूरी तैयारियां कर ली गईं। कोविड अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों में बेड की संख्या बढ़ाई गई। फिर से सांसों पर संकट न गहराए, इसके लिए अस्पतालों के हर बेड पर ऑक्सीजन का बंदोबस्त किया गया। पेश है अमर उजाला संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट...

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800 बेड पर 6800 एलपीएम ऑक्सीजन का इंतजाम
सालभर पहले कोरोना की दूसरी लहर के दौरान देशभर में ऑक्सीजन का संकट गहरा गया था। जिले में भी हालात काफी खराब हो गए थे। ऐसे भयावह मंजर का फिर से सामना न करना पड़े, इसकी पुख्ता तैयारियां की जा चुकी हैं। चार सरकारी अस्पतालों के अलावा दो स्वास्थ्य केंद्रों पर800 बेड के लिए 6800 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) ऑक्सीजन का इंतजाम किया जा चुका है। जिले में 11 नए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी उपलब्ध करा दिए गए हैं।

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा विश्वास
दूसरी लहर के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में कई बड़े बदलाव दिखे। हाई फ्लो नेजल केनुला (एचएफएनसी) प्रणाली के अलावा डी-डाइमर सरीखी जांच प्रचलन में नहीं थीं। इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) जैसी सुविधा सरकारी अस्पताल में नहीं थी। फेफड़ों के संक्रमण की जांच केवल विशेषज्ञ ही करते थे, लेकिन कोरोना महामारी ने सरकारी अस्पतालों में कई सुविधाएं दीं तो डॉक्टर से लेकर स्वास्थ्य कर्मियों तक को बहुत कुछ सीखने को मिला। नई दवाओं के इस्तेमाल की जानकारी मिली। वेंटिलेटर जैसी सुविधा भी मिली। बाल चिकित्सा प्रणाली में सुधार हुआ। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आम जन का विश्वास भी बढ़ा।
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पड़ोसी शहरों का मददगार बना नोएडा
अन्य जिलों व प्रदेश के करीब पांच लाख लोगों ने नोएडा में कोरोना से बचाव की वैक्सीन लगवाकर खुद को सुरक्षित किया। वहीं, कोरोना के उपचार में भी नोएडा पड़ोसी शहरों का मददगार बना। पहली लहर के दौरान सेक्टर-39 स्थित कोविड अस्पताल में 168 बेड की सुविधा दी गई थी। दूसरी लहर के दौरान 240 बेड उपलब्ध कराए गए जिन्हें बढ़ाकर 300 करना पड़ा। दिल्ली-एनसीआर के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से मरीजों ने इस अस्पताल में उपचार कराया।

क्षमता 50 बेड से अधिक तो लगाने पड़े पीएसए प्लांट
ऑक्सीजन उत्पादन के मामले में जिले को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकारी के अलावा निजी अस्पतालों को भी अलर्ट किया गया। 50 बेड से अधिक क्षमता वाले सभी अस्पतालों मेें पीएसए (हवा से ऑक्सीजन बनाने वाले) प्लांट लगाए गए। दूसरी लहर में ऑक्सीजन की खपत 40 से 50 मीट्रिक टन तक पहुंच गई थी। जनपद में ऐसे अस्पतालों की संख्या करीब 100 बताई जाती है जिनमें 50 बेड से अधिक क्षमता है।

दूसरी लहर के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने का काम किया गया। अब कोरोना की कोई लहर आएगी या नहीं, कह पाना मुश्किल है, लेकिन हर चुनौती से निपटने की तैयारी पूरी है। - डॉ. सुनील कुमार शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

चाइल्ड पीजीआई के डॉक्टरों व कर्मियों ने कोरोना संकट के दौरान बेहतर काम किया। बच्चों के उपचार से जुड़ी नई उपलब्धियां रोज संस्थान के नाम जुड़ रही हैं। सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास जारी है। -डॉ. अजय सिंह, निदेशक-चाइल्ड पीजीआई नोएडा

कोरोना ने काफी कुछ सिखा दिया है। चिकित्सक हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं। संक्रमण से बचने का अनुभव भी मिला है। बड़ी बात है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का विश्वास बढ़ा है। - तृतीय कुमार सक्सेना, नोडल अधिकारी, नोएडा कोविड अस्पताल
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कहां कितनी ऑक्सीजन का इंतजाम
अस्पताल बेड की संख्या ऑक्सीजन क्षमता
कोविड अस्पताल सेक्टर-39 240 2500
चाइल्ड पीजीआई सेक्टर-30 160 1250
ईएसआईसी सेक्टर-24 100 1000
जिम्स ग्रेटर नोएडा 200 1650
बिसरख सीएचसी 50 150
दादरी सीएचसी 50 250
(नोट:-ऑक्सीजन क्षमता के आंकड़े लीटर प्रति मिनट के हिसाब से हैं।)

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