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Noida News: रिसरफेसिंग की जगह अब सड़कों की होगी माइक्रो सरफेसिंग

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जल्दी उखड़ने और ऊंचाई बढ़ने की समस्या को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण की तैयारी
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परीक्षण के लिए सेक्टर- 6/7 के बीच 100 मीटर की सड़क पर माइक्रो सरफेसिंग करवाई गई
रिसरफेसिंग की तुलना में माइक्रो सरफेसिंग की लागत करीब 200 रुपये वर्ग फुट आती है कम

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर की सड़कें जल्दी उखड़ने और फिर रिसरफेसिंग करने पर उनकी ऊंचाई बढ़ने की समस्या को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण तकनीक में बदलाव करने जा रहा है। अब सड़कों की रिसर्फेसिंग की जगह माइक्रो सरफेसिंग करवाई जाएगी। माइक्रो सरफेसिंग कैसे की जाती है, यह किस तरह से उपयोगी होगी, इसका परीक्षण करने के लिए बुधवार को 100 मीटर की सड़क पर यह करवाई गई। सेक्टर-6/7 के बीच की सड़क पर माइक्रो सरफेसिंग का काम मौके पर पहुंच कर प्राधिकरण के अधिकारियों ने देखा। अब अगले 6 से 8 दिन तक यह देखा जाएगा कि विभिन्न परिस्थितियों में बिछाई गई नई सतह की स्थिति क्या रहती है।
परिक्षण के लिए इस सड़क पर पानी भी डाला जाएगा और भारी वाहन भी गुजारे जाएंगे। इसके बाद प्राधिकरण इस तकनीक पर उखड़ी सड़कों के टेंडर जारी करेगा। शुरुआत में 5 सड़कों पर माइक्रो सरफेसिंग होगी। प्राधिकरण के इंजीनियरों ने बताया कि माइक्रो सरफेसिंग तकनीक का उपयोग पहले से होता रहा है। यह बनी हुई सड़कों को सुरक्षित करती है। सड़क पर दरारें आसानी से नहीं आने नहीं देती हैं और इससे गड्ढे भी कम होते हैं। इसमें मशीन के जरिये डामर, मोटी पिसी गिट्टी व अन्य सामग्री का मिश्रण तैयार किया जाता है। फिर मशीन के जरिये इस मिश्रण को सड़क पर बिछा दिया जाता है। इससे सड़क की सतह भी बराबर रहती है।
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80 एमएम की तुलना में माइक्रो सरफेसिंग में सिर्फ 8-10 एमएम ही बढ़ेगी ऊंचाई
रिसरफेसिंग की तुलना में माइक्रो सरफेसिंग की लागत करीब 200 रुपये वर्ग फुट कम आती है। वहीं, रिसरफेसिंग में सड़क की ऊंचाई 80 एमएम बढ़ती है, लेकिन माइक्रो सरफेसिंग में सिर्फ 8-10 एमएम ही बढ़ेगी। अभी प्राधिकरण में व्यवस्था यह है कि सड़कों की रिसर्फेसिंग ही करवाई जा रही है। सड़कों की ऊंचाई ज्यादा न बढ़ जाए इसके लिए प्राधिकरण पुरानी सड़क की परत कटाई करवाकर उखड़वाता है। फिर दो परत बिछाई जाती हैं जिसमें पहली परत बिटुमिन और दूसरी मैस्टिक की रहती है। इन दोनों की ऊंचाई 80 एमएम या इससे ऊपर भी पहुंच जाती है। माइक्रो सरफेसिंग में यह समस्याएं नहीं आएंगी। दावा किया गया कि अगर सड़क की किनारों की संरचना सही है और नीचे मोटी गिट्टी की परत बची है तो आसानी से माइक्रो सरफेसिंग के जरिये सड़क की मरम्मत हो जाएगी।
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